LENS खुलासा : बालोद कौशल्या धाम विवाद, सरकारी नोटिस की उड़ी धज्जियां, अफसर खामोश

LENS खुलासा : बालोद कौशल्या धाम विवाद

LENS EXCLUSIVE : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डौंडीलोहारा इलाके में एक भव्य कौशल्या धाम मंदिर का निर्माण हो रहा है। माता कौशल्या से जुड़ी आस्था और छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल मानने वाली लोक मान्यता के बीच यह निर्माण विवादों में घिर गया है।वन विभाग का कहना है कि यह मंदिर आरक्षित वन भूमि पर बिना अनुमति के अवैध निर्माण है जबकि तुएगोंदी गांव के आदिवासी आरोप लगा रहे हैं कि उनके पारंपरिक देवस्थल पर कब्जा किया जा रहा है।

आदिवासियों का आंदोलन

हजारों आदिवासियों ने 1 जून को बालोद कलेक्ट्रेट का घेराव किया और बैरिकेडिंग तोड़ दी। उन्होंने महीनों से शिकायत करने के बावजूद प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। आदिवासी संगठनों ने 20 जून को संरक्षण यात्रा निकालने का ऐलान किया है जिसके चलते क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।

वन विभाग के नोटिस

विवाद नया नहीं है। 2019 में आदिवासियों की शिकायत के बाद सितंबर 2020 में वन विभाग ने बाबा बालयोगेश्वर उर्फ रामबालक दास को वन संरक्षण अधिनियम 1927 की धारा 80 के तहत पहला नोटिस जारी किया। विभाग ने 4.065 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया। इसके बाद 14 अक्टूबर 2020 को दूसरा नोटिस और 27 नवंबर 2020 को तीसरा नोटिस जारी किया गया। नोटिस में साफ पूछा गया कि अनाधिकृत निर्माण क्यों न हटाया जाए और खर्च क्यों न बाबा से वसूला जाए।

प्रशासन की चुप्पी

प्रशासनिक अधिकारियों से जब सवाल किया गया तो वे जवाब देने से इनकार कर रहे हैं। पूर्व DFO के ट्रांसफर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय आदिवासी लगातार विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके देवस्थल पर कब्जा किया जा रहा है। निर्माण कार्य अभी भी जारी है।

अब सवाल यह है कि बालोद में कानून का राज है या जंगल राज? वन विभाग के बार-बार नोटिस के बावजूद निर्माण पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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