सुअर कहने पर भड़के कल्याण बैनर्जी, महुआ मोइत्रा पर साधा निशाना, चीफ व्हिप पद से इस्तीफा

August 5, 2025 3:04 AM
Kalyan Banerjee podcast

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के एक बयान ने सियासी भूचाल ला दिया। कल्याण बनर्जी ने एक पॉडकास्ट में की गई टिप्पणी को लेकर अपनी ही पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा पर निशाना साधा। महुआ ने इस पॉडकास्ट में कल्याण बनर्जी को सुअर कहा था। कल्याण ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि किसी साथी सांसद की तुलना सुअर से करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह नागरिक संवाद के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन करता है।

कल्याण बनर्जी का चीफ व्हिप पद से इस्तीफा

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा पार्टी सहयोगी महुआ मोइत्रा के साथ कथित तकरार के बीच आया है। कल्याण ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की अध्यक्षता में तृणमूल सांसदों की डिजिटल बैठक में हिस्सा लेने के बाद इस्तीफे की घोषणा की।

कल्याण ने कहा, “जो लोग गाली-गलौज करते हैं, उन्हें यह तय करना चाहिए कि वे कैसी राजनीति कर रहे हैं। यह उनकी खोखली मानसिकता को दर्शाता है। जब कोई जनप्रतिनिधि अभद्र भाषा का उपयोग करता है, तो यह उसकी ताकत नहीं, बल्कि असुरक्षा का प्रतीक है।”

महुआ ने कल्याण की तुलना सुअर से की

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने महुआ मोइत्रा के बीजेडी नेता पिनाकी मिश्रा से विवाह की अफवाहों को लेकर निशाना साधा था। इसके जवाब में इंडिया टुडे के एक पॉडकास्ट में महुआ ने कहा, “आप सुअर से कुश्ती नहीं लड़ते, क्योंकि सुअर को गंदगी में लोटना पसंद है। भारत में महिला विरोधी, यौन कुंठित और भ्रष्ट पुरुष हैं, जो सभी पार्टियों में मौजूद हैं।”

इस पर कल्याण ने कहा, “मैंने जो कहा, वह सार्वजनिक जवाबदेही और व्यक्तिगत आचरण से जुड़े सवाल थे, जिनका सामना हर सार्वजनिक हस्ती को करना चाहिए, चाहे वह पुरुष हो या महिला। किसी पुरुष सहकर्मी को यौन कुंठित कहना साहस नहीं, बल्कि गाली है।”

‘महुआ गालियों के पीछे नहीं छिप सकतीं’

कल्याण ने कहा, “ऐसे बयान न केवल अभद्र हैं, बल्कि दोहरे मानदंड को भी बढ़ावा देते हैं। पुरुषों से चुपचाप सहने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यदि यही बात किसी महिला के लिए कही जाए, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाता। यदि महुआ सोचती हैं कि अभद्र गालियाँ देकर वे अपनी नाकामियों को छिपा लेंगी या उनसे गंभीर सवाल नहीं पूछे जाएँगे, तो वे स्वयं को धोखा दे रही हैं। जो लोग जवाब देने के बजाय गालियों पर निर्भर करते हैं, वे लोकतंत्र के चैंपियन नहीं हैं। इस देश की जनता उनकी इस हरकत को समझ सकती है।”

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