भारत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयान पर भड़का इरानी दूतावास

नई दिल्ली। भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के दूतावास ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो Marco Rubio के हालिया बयानों को खारिज कर दिया है। रूबियो में विदेशमंत्री एस जयशंकर के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस में ईरान को आतंकवाद का पोषक देश बताया था। रूबियो ने कहा था कि अमेरिका, ईरान को वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक नहीं बनाने देगा।

रूबियो के बयान पर ईरानी दूतावास ने वाशिंगटन पर क्षेत्रीय हकीकत को नजरअंदाज करने और अमेरिका व इजराइल की अस्थिर करने वाली नीतियों से ध्यान हटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया।भारत यात्रा के दौरान रुबियो के बयानों के जवाब में जारी प्रेस वक्तव्य में ईरानी दूतावास ने कहा कि तेहरान के खिलाफ लगाए गए आरोपों का मकसद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने में अमेरिका और जियोनिस्ट शासन की भूमिका से ध्यान भटकाना है।

नई दिल्ली स्थित दूतावास ने जोर देकर कहा कि दुनिया के प्रमुख तेल और ऊर्जा निर्यातकों में से एक ईरान हमेशा सभी देशों, जिसमें भारत भी शामिल है, को ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने को तैयार रहा है। इसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में व्यवधान को मुख्य रूप से ईरानी तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों का नतीजा बताया, जिसे तेहरान ने अवैध और अन्यायपूर्ण तथा अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया।

वक्तव्य में आगे आरोप लगाया गया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ दशकों से शत्रुतापूर्ण कदम उठाए हैं, जिसमें दवाओं और चिकित्सा उपकरणों तक पहुंच प्रभावित करने वाले प्रतिबंध शामिल हैं, जिससे व्यापक मानवीय पीड़ा हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर रुबियो के बयानों के जवाब में दूतावास ने अमेरिका और इजराइल पर क्षेत्र में सैन्य, उकसावे भरे और साहसिक कार्रवाइयों के जरिए समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया।ये दोनों शासन वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा संकट को बढ़ावा देने वाले मुख्य कारण हैं और अस्थिरता व असुरक्षा पैदा करके अपने राजनीतिक व सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तेहरान ने दोहराया कि उसकी परमाणु गतिविधियां पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में हैं।ईरान ने कहा कि वह परमाणु हथियारों के प्रसार निषेध संधि (NPT) का हस्ताक्षरकर्ता देश है और परमाणु प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को अपना “वैध और अविच्छेद्य अधिकार” मानता है तथा इस अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा।

वक्तव्य में यह भी दावा किया गया कि हालिया संघर्ष में ईरान सच्चा विजेता बनकर उभरा है, भले ही अमेरिका और इजराइल के सैन्य दबाव रहा हो।दूतावास के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ने सैन्य आक्रामकता के जरिए ईरान की राजनीतिक व्यवस्था बदलने की कोशिश की, लेकिन अपने उद्देश्यों में असफल रहे और अंततः युद्धविराम की मांग करने को मजबूर हुए। दूतावास ने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं देश की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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