भाकपा (माले) रेड स्टार ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, फासीवादी शासन को उखाड़ फेंकने का आह्वान

Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar

नई दिल्ली . भाकपा (माले) रेड स्टार ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए कहा है कि यह मांग फासीवादी शासन को उखाड़ फेंकने के व्यापक संघर्ष का प्रस्थान-बिंदु बननी चाहिए। पार्टी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति द्वारा जारी बयान में निर्वाचन आयोग की ‘अवैध’ कार्रवाइयों और SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

बयान में कहा गया है कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग द्वारा की गई कार्रवाइयों के ठोस तथ्य अब सामने आ रहे हैं। इनमें यह खुलासा भी शामिल है कि ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई असहमतियों और आपत्तियों को पूरी तरह अनदेखा करते हुए एकतरफा निर्णय लिए। अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कम-से-कम 14 बार आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज की थीं। इन खुलासों के बाद सभी विपक्षी दल अब ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर एकजुट हो गए हैं।

पार्टी ने याद दिलाया कि इससे पहले प्रगतिशील और लोकतांत्रिक शक्तियां SIR का लगातार विरोध कर रही थीं। खास तौर पर SIR की उस ‘तार्किक विसंगति’ को उजागर किया जा रहा था, जिसके माध्यम से मुख्य रूप से मुसलमानों और युवाओं को मताधिकार से वंचित किए जाने का खतरा पैदा हुआ था। राहुल गांधी को छोड़कर कई विपक्षी दल इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। अब जब तथ्य सामने आए हैं, तो विपक्षी दलों के साथ-साथ व्यापक जनता भी ज्ञानेश कुमार और उन्हें संरक्षण देने वाले शासन के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही है।

बयान में न्यायपालिका की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। पार्टी का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय असंवैधानिक और अवैध SIR को रोक सकता था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। शुरुआत में SIR संबंधी कार्यवाही भी लोकतांत्रिक न्यायिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं दिखी। न्यायालय ने SIR और उसकी ‘तार्किक विसंगति’ को बरकरार रखा, जिसके परिणामस्वरूप अंततः 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर किए जाने की स्थिति बनी।

हालांकि, अब सर्वोच्च न्यायालय ने CEC अधिनियम, 2023 की धारा 16 की संवैधानिक वैधता पर विचार करने की सहमति दी है। इस धारा के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को आधिकारिक कार्यों के लिए आजीवन प्रतिरक्षा दी गई है। 2023 के इसी कानून ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के चयन पैनल से मुख्य न्यायाधीश को हटाकर प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए केंद्रीय मंत्री को शामिल किया था। पार्टी का आरोप है कि इस बदलाव ने शासन को निर्वाचन आयोग पर प्रभाव बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया को अपने हित में इस्तेमाल करने का रास्ता दिया। जब कानून को चुनौती दी गई, तब न्यायालय ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

भाकपा (माले) रेड स्टार ने साफ कहा कि ज्ञानेश कुमार अकेले इस साजिश के जिम्मेदार नहीं हैं। वे उस फासीवादी शासन के औजार और मोहरे हैं, जिसका वैचारिक, राजनीतिक और सांगठनिक नियंत्रण RSS के हाथों में है। RSS बहुसंख्यकवादी फासीवादी हिंदू राष्ट्र की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ज्ञानेश कुमार को इसी परियोजना के लिए इस्तेमाल किया गया। उनकी कथित अवैध और असंवैधानिक कार्रवाइयां शासन की राजनीतिक दिशा के अनुरूप रहीं। परिणामस्वरूप चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। करोड़ों गैर-भाजपा मतदाताओं और मुसलमानों के नाम लक्षित तरीके से मतदाता सूचियों से हटाए जाने के आरोप लगे हैं। इसके चलते 21 राज्यों में ‘डबल इंजन सरकारों’ के सुदृढ़ होने का रास्ता बना।

पार्टी ने जोर दिया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ कार्रवाई और SIR प्रक्रिया को तत्काल समाप्त करने की मांग संघर्ष का अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकती। यह व्यापक संघर्ष की शुरुआत मात्र होनी चाहिए, जिसमें उस फासीवादी शासन को चुनौती दी जाए जिसने ज्ञानेश कुमार जैसे व्यक्तियों को अपने औजार के रूप में इस्तेमाल किया।

भाकपा (माले) रेड स्टार ने देश की मेहनतकश और उत्पीड़ित जनता तथा सभी लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और जनवादी ताकतों से आह्वान किया है कि वे इस चुनावी धोखाधड़ी के खिलाफ संघर्ष को सिर्फ निर्वाचन आयोग या किसी एक अधिकारी तक सीमित न रखें। इसे देशव्यापी जनआंदोलनों का प्रस्थान-बिंदु बनाएं और फासीवादी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए व्यापक जनप्रतिरोध आगे बढ़ाएं।

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