तुहीन देब, समसामयिक मामलों के टिप्पणीकार
ईरान फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय कुंभ FIFA वर्ल्ड कप 2026 में शामिल बाकी देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा उत्पीड़ित और प्रताड़ित है। फुटबॉल का विश्व कप चार साल बाद अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में संयुक्त रूप से आयोजित हो रहा है। ईरान, वियतनाम के बाद एकमात्र ऐसा देश है, जिसने अमेरिकी साम्राज्यवाद और आतंकवादी जियोनवादी युद्धअपराधी इजरायल की संयुक्त युद्ध मशीन को न सिर्फ रोक दिया बल्कि अपनी शर्तों पर इन मानवता के शत्रुओं को समझौता करने पर बाध्य किया। अब साम्राज्यवादी ट्रंप खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तर्ज पर विश्व कप में जब ईरान अपनी दक्षता को प्रमाणित कर भाग लेने आया है, तो उनको हर तरीके से परेशान और बर्बाद करने का ठान लिया है।
ट्रंप की धमकियों से फुटबॉल विश्व कप आयोजित करने वाली अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ फीफा कांप रहा है। इस विश्व कप में भाग लेने वाली दुनिया की बेहतरीन चुनिंदा 48 टीमों में से केवल ईरान को ही अमेरिका के निर्देश पर निशाना बनाया जा रहा है।
ईरान अब फीफा के सामने एक आधिकारिक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है, क्योंकि उसे अमेरिका में अपने विश्व कप मैचों से ठीक आखिरी समय तक प्रवेश से रोका गया।
अमेरिका के साथ चल रहे तनाव के कारण ईरान की राष्ट्रीय टीम को अपना टूर्नामेंट प्रशिक्षण शिविर सीमा पार मैक्सिको में स्थापित करना पड़ा है।
टूर्नामेंट के लिए लागू कड़े नियमों के तहत खिलाड़ियों को अमेरिका में केवल मैच से एक दिन पहले प्रवेश करने की अनुमति है और मैच खत्म होते ही उसी शाम उन्हें देश छोड़ना होगा।
टीम ने बेल्जियम के खिलाफ अपने आगामी ग्रुप चरण मुकाबले से पहले लॉस एंजिलिस में पहले पहुंचने की अनुमति मांगी थी।
लेकिन फीफा ने आधिकारिक रूप से इस अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसके बाद टीम के पास अब खेल की सर्वोच्च संस्था के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
ईरानी टीम को पहले ही भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा है, क्योंकि उसके आधिकारिक विश्व कप प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्यों के वीजा अमेरिका में आयोजित शुरुआती मैच से पहले पूरी तरह अस्वीकार कर दिए गए थे।
वाइट हाउस विश्व कप टास्क फोर्स के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू जूलियानी ने पुष्टि की है कि ये कड़े यात्रा प्रतिबंध निकट भविष्य में जारी रहेंगे।
इन प्रतिबंधों का मतलब है कि टीम को बेहद कठिन कार्यक्रम का सामना करना पड़ेगा — अमेरिका के लिए उड़ान भरना, मैच खेलना और मैच के दो घंटे के अंदर तुरंत वापस मैक्सिको के लिए उड़ान पकड़ना।
फुटबॉल विश्व कप के करीब 100 वर्षों के इतिहास में यहां तक कि शीत युद्ध के दौरान समाजवादी देशों की टीमों को भी, यूरोप,एशिया या अमरीकी महाद्वीप में ऐसा खुल्लमखुल्ला भेदभाव झेलना नहीं पड़ा था।
ईरान के द्वारा बारंबार फीफा से कहने के बावजूद फीफा कहती है कि ईरान को पहले से ही अमरीका में होने वाली दिक्कतों के बारे में बता दिया गया था। फीफा इस मामले में कुछ नहीं कर सकती। अब आप देखिए कि जिस तरह अमरीका के नेतृत्व में साम्राज्यवादी ताकतें पूरी दुनिया पर खासकर एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमरीका में अपनी नई गुलामी को लादने में लगी है वैसे ही ये ताकतें खेल और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपना एकछत्र अधिकार कायम करना चाहती हैं।
इसमें आशा की किरण ये है कि तमाम परेशानियों का सामना करके भी अभी तक सबसे ज्यादा उपेक्षित और प्रताड़ित ईरान की टीम ने विश्व कप में उम्दा प्रदर्शन किया है।और तो और उसने अमेरिका के विनाशकारी हवाई हमले में मारे गए ईरान के मिनाब शहर के स्कूल के शहीद 168 बच्चियों की याद में और फिलिस्तीन के गाजा में इजरायल के वहशी हमले में शहीद मासूमों की याद में स्टेडियम में बड़ा बैनर लहराया और दुनिया को साम्राज्यवादी ताकतों के जुल्मों को याद रखने को मजबूर किया।सचमुच ईरान की जनता ही जानती है कि शांति के लिए कितनी कीमत उन्होंने चुकाई है।
- तुहीन देब की फेसबुक पोस्ट











