लेंस डेस्क। Iran America Tension: दावोस से वापस लौटने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ दोबारा कड़े लहजे में बयानबाजी शुरू कर दी है। साथ ही अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिससे तनाव फिर से बढ़ गया है।
ईरान की ओर से भी सख्त प्रतिक्रिया आई है। तेहरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की तरफ से कोई भी सीमित या लक्षित सैन्य कार्रवाई को ईरान पूर्ण युद्ध के तौर पर लेगा और इसका जवाब बेहद सख्त और हर उपलब्ध संसाधन के साथ दिया जाएगा।
आईआरजीसी के एक कमांडर ने भी दावा किया कि उनकी उंगली ट्रिगर पर लगी हुई है। ईरानी सेना के प्रवक्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर सुप्रीम लीडर के खिलाफ कोई कदम उठाया गया तो पूरी दुनिया को आग के हवाले कर दिया जाएगा।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की है कि एक बड़ा अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ टॉमहॉक मिसाइलों से लैस तीन विध्वंसक जहाज और दर्जनों एफ-15ई फाइटर जेट मध्य पूर्व में तैनात किए जा रहे हैं।
ईरानी पक्ष का कहना है कि उनका देश हाई अलर्ट पर है और किसी भी बदतर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। लगातार अमेरिकी दबाव के कारण अपनी सुरक्षा के हर संभावित रास्ते खुले रखना उनकी मजबूरी बन गई है।
बता दें कि नए साल से ईरान में सरकार विरोधी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 5,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
ट्रंप ने पहले भी ईरान की इन कार्रवाइयों पर सैन्य हस्तक्षेप की बात कही थी, हालांकि कुछ समय पहले नरमी के संकेत मिले थे। लेकिन दावोस यात्रा के बाद उनके नए बयानों और सैन्य तैनाती ने स्थिति को फिर से गंभीर बना दिया है।
इजरायल तलाश रहा ईरान पर हमला का मौका
इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने कहा है कि इजरायल ईरान पर हमला करने का मौका तलाश रहा है, जो क्षेत्र को और अस्थिर कर सकता है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि इजरायल खास तौर पर ऐसा अवसर ढूंढ रहा है, हालांकि वे उम्मीद करते हैं कि कोई दूसरा रास्ता निकले।
फिदान ने हाल ही में तेहरान जाकर ईरानी नेताओं को इस बारे में साफ-साफ बता दिया था, क्योंकि दोस्त होने के नाते कड़वी हकीकत कहना जरूरी था। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने भी ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात की और कहा कि तुर्की ईरान में किसी विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ है तथा पड़ोसी देश की शांति और स्थिरता उसके लिए महत्वपूर्ण है।











