नहीं रहे आजादी के इतिहासकार मलविंदर जीत सिंह वराइच

Malwinder Jeet Singh Waraich

नई दिल्ली। प्रोफेसर मलविंदर जीत सिंह वराइच (Malwinder Jeet Singh Waraich) का आज सुबह करीब 7:30 बजे साकेत्री स्थित उनके आवास पर 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया! वे गदर पार्टी और भारत के अन्य क्रांतिकारी आंदोलनों पर अपने विद्वतापूर्ण लेखों और शोध कार्यों के लिए जाने जाते थे!

गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य करने के बाद, उन्होंने कानून की पढ़ाई की और पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालयों में जनहित से संबंधित मामलों में वकालत की।

जब पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के एकमात्र हिंदू मुख्य न्यायाधीश रण भगवान दास ने शहीद भगत सिंह के मुकदमे की कार्यवाही की चार खंडों वाली प्रति पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ को सौंपी, तो माननीय न्यायालय ने इस प्रति को वराइच साहब को संपादन और समझने के लिए सौंप दिया, क्योंकि कार्यवाही उर्दू में थी!

वराइच साहब ने इन कार्यवाही के आधार पर कम से कम पांच खंड प्रकाशित किए! वराइच साहब की वसीयत पीजीआई में पंजीकृत थी, इसलिए उनके परिवार ने आज सुबह ही उनका पार्थिव शरीर पीजीआई को चिकित्सा अनुसंधान और जरूरतमंद मरीजों के लिए अंगदान हेतु सौंप दिया। उनकी एकमात्र जीवित पुत्री डॉ. मिन्ना वराइच हैं। पंजाब के पूर्व एडवोकेट जनरल आर एस चीमा उनके मामा के बेटे हैं।

क्रांतिकारियों पर लिखने वाले पएकाधिक और गदर लहर दा मुंशी प्रो. एमजेएस वराइच का जीवन अनुकरणीय और प्रशंसनीय था, भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के प्रामाणिक इतिहासकारों और दस्तावेज़ संरक्षकों के लिए यह एक बहुत बड़ी क्षति है।

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