जंग की जद में : Dubai Dreams का क्या होगा ?

Dubai Dreams: दुनिया के सबसे चमकदार शहर दुबई पर ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध की छाया गहरा गई है। Burj Khalifa की रोशनी, Palm Jumeirah की लग्जरी विलाएं और दुनिया के सबसे बड़े शॉपिंग मॉल अब खाली पड़े हैं। पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट के साथ होटल, रेस्तरां और एविएशन सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। होटलों की ऑक्यूपेंसी घटकर 15-20% रह गई है। 2.26 लाख से ज्यादा शॉर्ट-टर्म बुकिंग रद्द हो चुकी हैं। लग्जरी सेल्स और शॉपिंग मॉल में फुटफॉल 45-60% तक गिर गया है। रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन में 37-49% की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय पर्यटक अब दुबई की जगह श्रीलंका, बाली, सिंगापुर और जापान की ओर रुख कर रहे हैं।

भारतीयों पर सबसे बड़ा असर

दिल्ली से दुबई सिर्फ 4 घंटे की उड़ान है, इसलिए दुबई भारतीयों का सबसे पसंदीदा शहर रहा है। यहां 44 लाख भारतीय रहते हैं जो मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, रिटेल और सर्विस सेक्टर में काम करते हैं। युद्ध के कारण हजारों भारतीय कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेज दिया गया है। एक दक्षिण एशियाई वेटर ने कहा, ‘ये कोविड जैसा लग रहा है. डर है कि नौकरी चली जाए और घर लौटना पड़े।’ कई प्रवासी पहले से कर्ज में डूबे हैं, अब उनकी स्थिति और खराब हो गई है। होटल, रेस्तरां और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले हजारों भारतीय कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेज दिया गया है।

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दुबई में भारतीय सेलेब्रिटीज के भी बड़े-बड़े निवेश हैं, शाहरुख खान का Palm Jumeirah में विला सलमान खान का The Address Downtown में लग्जरी अपार्टमेंट, अभिषेक बच्चन-ऐश्वर्या राय का Jumeirah Golf Estates में गोल्फ व्यू विला, अनिल कपूर, शिल्पा शेट्टी-राज कुंद्रा, मलाइका अरोड़ा, विवेक ओबेरॉय और कई अन्य बॉलीवुड स्टार्स की यहां प्रॉपर्टी है। मुकेश अंबानी ने भी Palm Jumeirah पर अपने बेटे अनंत के लिए ultra-luxury विला खरीदा है। सानिया मिर्जा, अल्लू अर्जुन, माहेश बाबू जैसी हस्तियां भी यहां निवेश कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो भारत को गल्फ देशों से आने वाले रेमिटेंस में 42,000 से 84,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।

पर्यटन और होस्पिटैलिटी पर भारी संकट

पिछले साल 2025 में दुबई ने लगभग 2 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत किया था। लेकिन युद्ध शुरू होते ही सब बदल गया। होटलों की ऑक्यूपेंसी 15-20फीसदी % तक सिमट गई है।ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स का अनुमान है कि अगर जंग लंबी खिंची तो पूरे मिडिल ईस्ट में 2.3 से 3.8 करोड़ कम पर्यटक आएंगे और 34 से 56 अरब डॉलर का नुकसान होगा।

इस गर्मी में भारतीय अब दुबई की जगह श्रीलंका, सिंगापुर, वियतनाम, बाली, मलेशिया और जापान की यात्रा प्लान कर रहे हैं। IRCTC ने जापान के नए पैकेज लॉन्च किए हैं और ट्रैवल एजेंट्स कह रहे हैं कि भूटान, नेपाल और साउथ ईस्ट एशिया की डिमांड काफी बढ़ गई है।

एविएशन, ट्रांजिट हब और दूसरे सेक्टर्स पर भारी मार

दुनिया के सबसे व्यस्त ट्रांजिट हब दुबई, अबू धाबी और दोहा ठप पड़े हैं। सिर्फ मार्च में 30,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। अफगानिस्तान बनाम श्रीलंका क्रिकेट सीरीज समेत कई अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स इवेंट्स रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं।दुबई लंबे समय से IPL मैचों, T20 लीग और बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का पसंदीदा वेन्यू रहा है। लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने क्रिकेट सहित कई स्पोर्ट्स इवेंट्स को बुरी तरह प्रभावित किया है।कई अन्य अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स इवेंट्स भी प्रभावित हुए, जैसे Fujairah में ATP Tennis Challenger टूर्नामेंट को सुरक्षा अलर्ट के कारण रद्द करना पड़ा। इससे होटल बुकिंग, टिकट सेल, स्पोर्ट्स टूरिज्म और लोकल इकोनॉमी को भारी नुकसान हुआ है।

UAE चुप क्यों?

ईरान द्वारा 2000 ड्रोन और 450 मिसाइलें दागे जाने के बावजूद UAE ने कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की। कारण हैं – ईरान के साथ 25-27 अरब डॉलर का व्यापार, द्वीप विवाद और अपनी सेना की सीमित क्षमता। दुबई सरकार ने संकट से निपटने के लिए ₹2,270 करोड़ का राहत पैकेज घोषित किया है लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

दुबई, जो कभी सपनों का शहर कहा जाता था, आज युद्ध की वजह से संकटों से जूझ रहा है। अगर युद्ध जल्दी नहीं रुका तो दुबई का पूरा समर सीजन भी बर्बाद हो सकता है। आर्थिक व्यवस्था चरमरा सकती है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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