चीन में हॉलीवुड या बॉलीवुड ! क्या भारतीय सिनेमा को मिलेगा अमेरिकी-चीन टैरिफ वॉर का फायदा ?

April 22, 2025 2:24 PM
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इंटरटेनमेंट डेस्‍क। चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिनेमा बाज़ार है जहाँ हॉलीवुड और बॉलीवुड फिल्में अपनी जगह बनाने में जुटी हैं। हॉलीवुड पर बढ़ते प्रतिबंधों ने भारतीय फिल्मों के लिए चीनी दर्शकों तक पहुँचने का रास्ता खोला है। दंगल और महाराजा जैसी फिल्मों ने कमाल दिखाया है लेकिन चुनौतियाँ भी हैं। आइए इस बदलते परिदृश्य को समझतें हैं।

चीन का सिनेमा बाज़ार हाल के वर्षों में तेज़ी से बदला है। 2018 में यह अमेरिका को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा बॉक्स ऑफिस बना था। लेकिन 2024 में इसकी कुल कमाई ₹48,900 करोड़ (42.502 बिलियन युआन) रही, जो 2023 के ₹63,150 करोड़ (54.915 बिलियन युआन) से 22.6% कम थी। इस गिरावट ने हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों को प्रभावित किया लेकिन भारतीय सिनेमा के लिए यह एक नया अवसर लेकर आया।

हॉलीवुड का प्रदर्शन

हॉलीवुड अपनी हाई-बजट फिल्मों और तकनीकी उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। 1994 से चीन ने विदेशी फिल्मों को सीमित संख्या में अनुमति दी और 2012 के समझौते के बाद हर साल 34 विदेशी फिल्में रिलीज़ होती हैं जिनमें ज़्यादातर हॉलीवुड की होती हैं।

ट्रांसफॉर्मर्स: द लास्ट नाइट (2017) ने चीन में ₹1,000 करोड़ की शुरुआती कमाई की जबकि अमेरिका में यह ₹560 करोड़ थी। 2018 में हॉलीवुड ने चीन के बॉक्स ऑफिस में करीब ₹32,200 करोड़ कमाए। हालांकि, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और सख्त नियमों ने हॉलीवुड की राह कठिन कर दी।

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2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चीनी सामानों पर 104% टैरिफ की घोषणा के बाद हॉलीवुड फिल्मों पर प्रतिबंध की चर्चा है। सेंसरशिप भी चुनौती है जैसे रेड डॉन (2012) में चीनी सेना को उत्तर कोरियाई सेना दिखाना पड़ा। कोविड-19 के बाद 2020-2021 में हॉलीवुड की कमाई घटी और स्थानीय फिल्में जैसे फुल रिवर रेड ने बाजार पर कब्जा किया।

बॉलीवुड के लिए नयी राह

बॉलीवुड ने पिछले दशक में चीन में उल्लेखनीय प्रगति की है। 1950 के दशक में राज कपूर की आवारा ने चीनी दर्शकों को प्रभावित किया था। 2009 में 3 इडियट्स ने पाइरेसी के ज़रिए लोकप्रियता हासिल की और डौबन रेटिंग में 12वें स्थान पर रही। आमिर खान की दंगल (2016) ने चीन में ₹1,500 करोड़ की कमाई की जो किसी गैर-अंग्रेजी विदेशी फिल्म की सबसे बड़ी कमाई थी। सीक्रेट सुपरस्टार (2017) ने ₹970 करोड़, बजरंगी भाईजान (2015) ने ₹360 करोड़, हिंदी मीडियम (2017) ने ₹260 करोड़, और अंधाधुन (2018) ने ₹375 करोड़ कमाए।

2024 में विजय सेतुपति की महाराजा ने ₹88 करोड़ कमाए जो पहले की सफलताओं से कम था क्योंकि चीन का बॉक्स ऑफिस महामारी के बाद पूरी तरह नहीं उबरा। भारतीय फिल्में अपनी भावनात्मक कहानियों और सांस्कृतिक समानताओं,जैसे परिवार और शिक्षा के मूल्यों के कारण चीनी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। 2017 में बॉलीवुड ने चीन में कुल ₹2,990 करोड़ की कमाई की थी।

हॉलीवुड की चुनौतियाँ

चीनी सरकार स्थानीय फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए विदेशी फिल्मों का कोटा सीमित कर रही है। सेंसरशिप नियमों के कारण कहानियों में बदलाव करना पड़ता है जो रचनात्मकता को प्रभावित करता है। 2024 में शहरी थिएटर्स में दर्शकों की संख्या 1.01 बिलियन थी जो 2023 के 1.299 बिलियन से कम थी।

बॉलीवुड की चुनौतियाँ

वितरण स्थानीय वितरकों पर निर्भर है जो बाज़ार को नियंत्रित करते हैं जिससे बड़े रिलीज़ में मुश्किल होती है। 2020 के गलवान घाटी तनाव ने भारतीय फिल्मों की रिलीज को अस्थायी रूप से प्रभावित किया हालांकि अब स्थिति बेहतर है।

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क्या है आगे की राह ?

हॉलीवुड सह-निर्माण और चीनी कलाकारों को शामिल करने पर ध्यान दे रहा है। बॉलीवुड को मज़बूत वितरण नेटवर्क और स्थानीय साझेदारियों की जरूरत है। 2014 की भारत-चीन सह-निर्माण संधि ने कुंग फू योगा जैसी फिल्में दीं और ऐसी पहल भविष्य में मदद कर सकती हैं।

हॉलीवुड की घटती हिस्सेदारी ने बॉलीवुड के लिए चीनी दर्शकों तक पहुँचने का रास्ता खोला है। दंगल और सीक्रेट सुपरस्टार ने साबित किया कि सही कहानी भाषा और संस्कृति की दीवारें तोड़ सकती है। लेकिन वितरण और सेंसरशिप की चुनौतियों को पार करना होगा। अगर भारतीय निर्माता स्थानीय वितरकों के साथ बेहतर तालमेल बनाएँ तो बॉलीवुड चीन में नई ऊंचाइयां छू सकता है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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