लेंस डेस्क। पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) को अस्पताल भेजने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि इमरान खान को अगले दो दिनों के अंदर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। उनकी सेहत की जांच और इलाज के लिए एक मेडिकल बोर्ड भी बनाया जाएगा।
बहनों से मुलाकात को मौलिक अधिकार बताया
कोर्ट ने इमरान खान की बहनों से मुलाकात को लेकर भी साफ बात कही। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि बहनों से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले तीन साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों की जानकारी मांगी है। इसके अलावा इमरान के बेटों से उनकी बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।
मेडिकल रिपोर्ट पर नाराजगी
तीन जजों की बेंच (जस्टिस शाहिद वहीद, जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम) ने इमरान के इलाज और परिवार से मुलाकात से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने अडियाला जेल प्रशासन से पूरी मेडिकल रिपोर्ट मांगी। सिर्फ सारांश पेश करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।
जेल की रिपोर्ट में इमरान की सेहत को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, उनके ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, दिल की धड़कन तेज होने और मानसिक तनाव की समस्या है। हालिया ब्लड प्रेशर 140/80 और नब्ज 54 प्रति मिनट दर्ज की गई। फरवरी में उनका ब्लड प्रेशर सामान्य (120/80) था। रिपोर्ट में आंख की बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन का भी जिक्र है, जिसका इलाज चल रहा है।
मेडिकल बोर्ड का गठन
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान की सेहत की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया है। इस बोर्ड में इमरान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके निजी डॉक्टर को भी शामिल किया जाएगा। बोर्ड पूरी जांच करेगा, पुरानी रिपोर्ट देखेगा और बताएगा कि इलाज जेल में संभव है या अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है।
कोर्ट ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से अपील की कि इमरान की सेहत को राजनीतिक मुद्दा न बनाया जाए।
इमरान तीन साल से जेल में
73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह जैसे कई मामले दर्ज हुए। कुछ मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है लेकिन अन्य मामलों के चलते वे अभी भी जेल में बंद हैं। पीटीआई का आरोप है कि इमरान के खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से चलाए जा रहे हैं जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती है।











