हाथियों की शोक सभा? क्या हाथी भी निभाते हैं सामाजिक व्यवहार? मध्यप्रदेश में मृत हाथी के दफन स्थल का मामला चर्चा में

शहडोल। क्या आपने सोचा है कि जंगली जानवर भी अपने साथी की मौत के बाद शोक सभा मनाते हैं? जंगल में हुई ऐसी ही एक शोक सभा चर्चा में बनी हुई हैं। हाथियों का एक झुंड अपने साथी की मौत के बाद उसके दफ़न स्थल पर पहुंचता है और अपना शोक प्रकट करता है।
दरअसल, शहडोल जिले के चंदौली गांव में करंट लगने से एक नर हाथी की मौत के बाद उसके झुंड के अन्य हाथियों का दफन स्थल पर दोबारा पहुंचना चर्चा का विषय बना हुआ है। वन विभाग के अनुसार, हाथियों में सामाजिक जुड़ाव और स्मरण क्षमता से संबंधित विशेष व्यवहार देखने को मिलता है। उत्तर वन मंडलाधिकारी तरुणा वर्मा ने बताया कि हाथियों का अपने झुंड के सदस्यों के प्रति गहरा लगाव होता है और साथी की मृत्यु के बाद उनके व्यवहार में विशेष बदलाव दिखाई दे सकता है।

खेत के पास करंट लगने से हुई थी हाथी की मौत

मामला पश्चिम ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के पीएफ-77, बीट चचाई के ग्राम चंदौली के वार्ड क्रमांक 7 राजस्व क्षेत्र का है। यहां खेत के पास बोरवेल के नजदीक करंट लगने से लगभग 15 वर्षीय नर मखना हाथी की मौत हो गई थी। घटना के बाद वन विभाग द्वारा नियमानुसार हाथी के शव को जमीन में दफनाया गया। इसके बाद मृत हाथी के झुंड के अन्य सदस्य उसी स्थान पर पहुंचे। हाथियों के दोबारा दफन स्थल पर पहुंचने की घटना ने उनके आपसी संबंधों और सामाजिक व्यवहार को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

डीएफओ तरुणा वर्मा ने दी हाथियों के व्यवहार की जानकारी

उत्तर वन मंडलाधिकारी तरुणा वर्मा ने बताया कि हाथी सामाजिक प्रवृत्ति के वन्यजीव हैं। वे झुंड में रहते हैं और उनके बीच लंबे समय तक आपसी संबंध बने रहते हैं। किसी साथी की मृत्यु के बाद हाथियों में विशेष प्रकार का व्यवहार देखने को मिल सकता है, जिसे शोक व्यक्त करने जैसे व्यवहार के रूप में समझा जाता है। उन्होंने बताया कि हाथी की मृत्यु वाले दिन भी झुंड उसी स्थान पर वापस पहुंचा था। अगले दिन भी झुंड के हाथियों का वहां पहुंचना उनके सामाजिक व्यवहार और मृत साथी के स्थान से जुड़े परिचय का हिस्सा हो सकता है।

स्मरण क्षमता और सामाजिक जुड़ाव हाथियों की विशेषता

हाथियों की स्मरण क्षमता और झुंड के सदस्यों के साथ उनके संबंध उनके व्यवहार के महत्वपूर्ण पहलू हैं। पूर्व में परिचित स्थानों पर लौटना और अपने समूह के सदस्यों के प्रति विशेष प्रतिक्रिया देना हाथियों के सामाजिक जीवन की उल्लेखनीय विशेषताएं मानी जाती हैं।

हालांकि, किसी स्थान पर हाथियों के पहुंचने के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि वे मनुष्यों की तरह शोक सभा कर रहे थे। इसके बावजूद, यह घटना हाथियों के व्यवहार, उनकी स्मरण क्षमता और आपसी जुड़ाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

वन्यजीवों के संरक्षण और व्यवहार को समझने की आवश्यकता

चंदौली गांव की यह घटना वन्यजीवों के सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाती है। हाथियों का समूह में रहना, अपने साथियों के साथ संबंध बनाए रखना और मृत हाथियों के प्रति विशेष व्यवहार प्रदर्शित करना उनके जटिल सामाजिक जीवन को दर्शाता है। करंट लगने से हाथी की मौत की घटना वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति सतर्कता की आवश्यकता भी रेखांकित करती है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके सुरक्षित विचरण क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

3 पर FIR; जांच के घेरे में अन्य लोग

शहडोल के ब्यौहारी में 15 वर्षीय नर मखना हाथी की करंट लगने से मौत के मामले में वन विभाग ने तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। घटना ग्राम चंदौली की है, जहां धान के खेत में अवैध रूप से बिजली का तार बिछाकर करंट प्रवाहित किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि घटना के बाद तार काटकर साक्ष्य छिपाने का प्रयास किया गया।

नितिन मिश्रा

नितिन मिश्रा फ्रीलांस जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 3 वर्षों का अनुभव है। रायपुर में 2023 से द सूत्र में रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान क्राइम, राजनीति, नगर निगम, आंदोलन और जनहित से जुड़ी खबरें की। द सूत्र के बाद सैटेलाइट चैनल TV 24 और ASIAN NEWS में काम किया। इस दौरान नितिन मिश्रा ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, कल्‍चरल, स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज, डिफेंस और ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की हैं। वर्तमान में नितिन पत्रकारिता एवं जनसंचार में Ph.D कर रहें हैं।

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