नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ियों की लिस्ट में नाम आने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है। हालांकि दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी एंट्री को सही मान लिया गया है।
रेखा गुप्ता की माताजी और पिताजी की उम्र में 15 वर्ष का अंतर था।दिल्ली में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत नोटिस पाने वाले वोटरों में सीएम रेखा गुप्ता का नाम भी लिस्ट में सामने आया। अब इस पर चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है।
आयोग ने बताया कि SIR प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ियों की लिस्ट में नाम आने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को नोटिस जारी किया गया था।
रेखा गुप्ता की एंट्री को सही माना गया
चुनाव आयोग के मुताबिक मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मतदाता सूची में दर्ज एंट्री को सत्यापित करने के दौरान एक Logical Discrepancies कैटेगरी में चिन्हित किया गया, जिसके बाद उन्हें नोटिस जारी हुआ।
चुनाव अधिकारी ने आगे बताया कि उनके तथ्यों और दस्तावेजों की जांच के बाद, उनकी एंट्री को सही मान लिया गया है और इसे AC-14 शालीमार बाग की फाइनल मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
केजरीवाल को भी भेजी गई नोटिस
दिल्ली में चल रही मतदाता सूची SIR प्रक्रिया के तहत पूर्व सीएम और AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल समेत उनके परिवार के 5 सदस्यों को नोटिस जारी किया गया है।
ये नोटिस ‘Unmapped with Last SIR’ यानी पिछली SIR की वोटर लिस्ट से मैप नहीं होने की कैटेगरी में रखकर जारी किए गए।
ये सभी नोटिस विधानसभा क्षेत्र संख्या 40 यानी कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के संबंधित हिस्से से जुड़े हुए हैं।जानकारी के मुताबिक अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के अलावा इस खास पार्ट में कुल 110 वोटरों को नोटिस भेजे गए हैं।
4 नवंबर को फाइनल वोटर लिस्ट होगी प्रकाशित
गौरतलब है कि दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम चल रहा है।चुनाव अधिकारी ने बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।
पूर्व नौकरशाह जोशी ने क्या कहा
पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी ने इस प्रकरण में कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को पूरी जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। जब आपकी प्रणाली “माता-पिता की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर” होने के कारण दिल्ली के मुख्यमंत्री सहित 1.6 लाख नागरिकों को प्रतिबंधित कर देती है, तो यह या तो घोर अक्षमता या जानबूझकर की गई मनमानी को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह चुनावी निष्पक्षता नहीं है। यह संस्थागत विफलता है।











