लेंस डेस्क | भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) जम्मू सोशल मीडिया पर विवादों और चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम (दीपोत्सव/दीया जलाओ उत्सव) में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों पर ₹500 की पेनल्टी (जुर्माना)लगाई गई है। इस दावे से जुड़े कथित मैसेजेस और पोस्ट्स वायरल होने के बाद छात्रों, शिक्षाविदों और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है।
वायरल दावे में क्या है ?

सोशल मीडिया और ऑनलाइन स्टूडेंट फोरम्स पर साझा की जा रही जानकारियों के अनुसार:
संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल न होने वाले विद्यार्थियों से ₹500 का जुर्माना वसूलने अथवा अनुपस्थिति का लिखित स्पष्टीकरण मांगने से जुड़ा मैसेज प्रसारित किया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स और पूर्व छात्रों ने इसे छात्रों की व्यक्तिगत सहमति, स्वतंत्रता और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता पर सवाल खड़े करने वाला फैसला बताया है। कुछ राजनीतिक प्रतिनिधियों और नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाकर केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के अनिवार्य दिशा-निर्देशों पर आपत्ति जताई है।
संस्थागत स्वायत्तता और छात्र सहमति पर उठे सवाल
यदि इस तरह के जुर्माने या अनिवार्य उपस्थिति के दावों में सत्यता पाई जाती है, तो यह कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
- क्या किसी राजनीतिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना छात्रों की स्वेच्छा पर निर्भर होना चाहिए या इसे अनिवार्य बनाया जा सकता है?
- प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों (IIMs) में अनुशासन और शैक्षणिक गरिमा बनाए रखने के नियमों की सीमा कहां तक होनी चाहिए?
इस ₹500 के जुर्माने वाले दावे पर IIM जम्मू प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। आधिकारिक पुष्टि होने पर इस खबर को अपडेट किया जाएगा।










