नई दिल्ली। सरकार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से उन छह भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों की पहचान जारी की है, जो Operation Sindoor के दौरान कार्रवाई में शहीद हुए थे। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए भारत की सैन्य प्रतिक्रिया थी। रक्षा मंत्रालय ने इन दावों को गलत बताया है।
रक्षा मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के छह शहीद सैनिकों के नामों को पहली बार सार्वजनिक किए जाने के दावों को पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि 11 मई, 2025 को सैन्य अभियान के तुरंत बाद तत्कालीन महानिदेशक सैन्य संचालन (DGMO) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी थी।
इसके अतिरिक्त, 14 अगस्त, 2025 को इन बहादुरों के वीरता पुरस्कारों की आधिकारिक घोषणा भी सार्वजनिक की जा चुकी थी। राष्ट्रीय समर स्मारक (NWM) पर शहीदों के नाम अंकित करने की प्रक्रिया एक तय प्रोटोकॉल के तहत पूरी की गई है।
कौन कौन जवान हुए शहीद
इन छह जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की वेबसाइट पर सम्मान सूची (Roll of Honour) में जोड़ दिए गए हैं और नई दिल्ली स्थित स्मारक की वॉल 3D पर 2025 अनुभाग में अंकित कर दिए गए हैं। यह अनुभाग उन रक्षा कर्मियों के लिए समर्पित है, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में परम बलिदान दिया।
शहीद जवानों में सूबेदार मेजर पवन कुमार (भारतीय सेना), राइफलमैन सुनील कुमार, वीर चक्र (भारतीय सेना), लांस नायक दिनेश कुमार (भारतीय सेना), एविएशन टेक्नीशियन मूड मुरलीनायक (भारतीय सेना), हवलदार सुनील कुमार सिंह (भारतीय सेना) औेर सार्जेंट सुरेंद्र कुमार, वायु मेडल (भारतीय वायु सेना) में हैं।
पहली आधिकारिक स्वीकारोक्ति
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की सम्मान सूची में इनका शामिल किया जाना ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए सैनिकों की पहचान का पहला आधिकारिक सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है। इससे पहले, मई 2025 के चार दिवसीय संघर्ष के दौरान सैन्य हताहतों की खबरों के बावजूद सरकार ने उनकी पहचान आधिकारिक रूप से नहीं बताई थी।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर?
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 आम नागरिक मारे गए थे।इस ऑपरेशन के दौरान भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ढांचों पर हमले किए। इसके साथ ही पाकिस्तानी जवाबी ड्रोन, मिसाइल और सीमा पार हमलों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया।
चार दिन तक चला युद्ध
भारतीय बलों ने पाकिस्तानी वायु सेना की प्रमुख सुविधाओं, जिनमें नूर खान एयर बेस और रहीम यार खान एयर बेस शामिल हैं, पर भी हमले किए।इस ऑपरेशन के परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच चार दिन तक सैन्य शत्रुता चली, जिसके बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान ने सैन्य अभियानों को रोकने के लिए समझौता घोषित किया।
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