नेशनल ब्यूरो,अहमदाबाद। गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों Gujarat local body elections के लिए आज जब गिनती हो रही हैं, ऐसे समय में राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव, मतदान या मतगणना एजेंट के रूप में अपराधियों को नियुक्त करने की छूट दे देने से विवाद खड़ा हो गया है। पहले यह नियम था कि कोई अपराधी मतगणना या मतदान के समय एजेंट नहीं हो सकता है।
अयोग का यह निर्णय लोकतंत्र के लिए एक कड़ा झटका साबित हुआ है।‘एजेंट पर कोई अपराध दर्ज न हो या आपराधिक इतिहास न हो’, ऐसी शर्त अब हटा दी गई है। गुजरात चुनाव आयोग द्वारा र चुनाव एजेंट की नियुक्ति के संबंध मे 23 अप्रैल को परिपत्र जारी किया गया था। इसमें राज्य पक्ष द्वारा चुनाव एजेंट, मतदान एजेंट और मतगणना एजेंट के रूप में अपने कार्यकर्ताओं की नियुक्ति का जिक्र था, जिसे चुनाव अधिकारी द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता दी जाती है।
परिपत्र में शुरुआती सारी जानकारियाँ सामान्य थीं, लेकिन अंतिम हिस्से में चुनाव आयोग ने एक गंभीर बात लिखी है। जिसमें चुनाव एजेंट के रूप में अपराधियों को नियुक्त करने की छूट दे दी गई है।परिपत्र में लिखा गया था: “नियुक्त किए जाने वाले चुनाव एजेंट, मतदान एजेंट, मतगणना एजेंट पर किसी भी प्रकार का अपराध दर्ज न हो या आपराधिक इतिहास न हो” — यह शर्त अब हटा दी गई है।
एक तरफ निष्पक्ष और तटस्थ चुनाव की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ अगर मतदान केंद्र परअपराधी एजेंट के रूप में बैठेंगे तो लोग कैसे निर्भय होकर मतदान कर सकेंगे? कैसे मतगणना होगी? यह बड़ा सवाल है।










