आदिवासी मुद्दों पर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का बड़ा प्लान, बस्तर से शुरू होगा आंदोलन; राहुल गांधी भी होंगे शामिल

Congress

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकारों और जल-जंगल-जमीन के मुद्दे पर Congress ने सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। राजधानी रायपुर में बुधवार को आदिवासी कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की बैठक के बाद ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई। इन बैठकों में आदिवासी अधिकारों, विस्थापन, खनिज संसाधनों के दोहन, पेसा कानून और आदिवासी संस्थानों में कथित हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मध्यप्रदेश के झाबुआ विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया की मौजूदगी में हुई बैठक में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ आंदोलन को जमीन पर उतारने का फैसला लिया। डॉ. भूरिया ने कार्यकर्ताओं से आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। बैठक के बाद उन्होंने कहा कि आदिवासियों के हित में ऐसा बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हों।

बैठक में विक्रांत भूरिया ने कहा कि आदिवासी समाज के हित में अब बड़ा आंदोलन खड़ा करने का समय आ गया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में लोगों को आंदोलन से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी हितों के लिए ऐसी बड़ी लड़ाई लड़नी है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हों।

विक्रांत भूरिया ने संकेत दिया है कि कांग्रेस आने वाले दिनों में आदिवासी बहुल इलाकों में संगठन को सक्रिय करने और सरकार के खिलाफ जमीन पर आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया ने कार्यकर्ताओं और नेताओं को संगठन को मजबूत करने तथा आदिवासी समाज के मुद्दों पर मिलकर काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि अब आदिवासी हितों की लड़ाई को जमीन पर ले जाने का समय है। बैठक के बाद कांग्रेस ने प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी शुरू करने का संकेत दिया।

बैठक में कांग्रेस के दिग्गज नेता जुटे

आदिवासी कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम समेत कई विधायक, पूर्व विधायक और आदिवासी कांग्रेस से जुड़े नेता शामिल हुए।

बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आदिवासी मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आदिवासी समाज के बीच जाकर काम करने का आह्वान किया।

पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि आदिवासी राजनीति सिर्फ चुनाव तक सीमित न रहे, बल्कि जल-जंगल-जमीन, विस्थापन, वन अधिकार और ग्रामसभा जैसे मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक अभियान चलाया जाए।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। नेताओं का कहना था कि आदिवासी समाज के संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें लेकर संगठन को गांव और जमीन तक जाना होगा।

बैठक में कांग्रेस नेताओं का जोर इस बात पर रहा कि आदिवासी राजनीति सिर्फ चुनाव तक सीमित न रहे, बल्कि जल-जंगल-जमीन, विस्थापन, वन अधिकार और ग्रामसभा जैसे मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक और सामाजिक अभियान चलाया जाए।

CM साय पर विक्रांत भूरिया का निशाना

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लेकर भी कांग्रेस नेताओं ने निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री खुद आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन आदिवासी दिवस के मौके पर समाज को शुभकामनाएं देने तक से परहेज करते हैं।

कांग्रेस ने इसे आदिवासी समाज के प्रति सरकार के रवैये से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए। बैठक में आदिवासी दिवस नहीं मनाए जाने को लेकर सरकार के खिलाफ राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर विरोध दर्ज कराने का फैसला लिया गया।

इससे पहले भी विक्रांत भूरिया ने छत्तीसगढ़ में आदिवासी अधिकारों को लेकर सरकार पर तीखे सवाल उठाए थे। 20 अगस्त को रायपुर में प्रस्तावित बैठक की जानकारी देते हुए उन्होंने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर बड़े आंदोलन की रणनीति बनाने की बात कही थी।

ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी में छह बड़े फैसले

प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई। इसमें आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत, प्रेमसाय सिंह टेकाम, आदिवासी विधायक, पूर्व विधायक और नेशनल डेलीगेट्स शामिल हुए।

बैठक में आदिवासी मुद्दों को लेकर छह प्रमुख फैसले लिए गए।

पहला: आदिवासी दिवस नहीं मनाए जाने को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। कांग्रेस ने इसे आदिवासी समाज के प्रति सरकार की संवेदनहीनता बताते हुए राजनीतिक मुद्दा बनाने का फैसला किया।

दूसरा: कांग्रेस ने प्रदेश के आदिवासी आश्रमों और छात्रावासों में संघ से जुड़े लोगों की भर्ती किए जाने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की निगरानी और जानकारी जुटाने के लिए एक निगरानी कमेटी बनाने का निर्णय लिया गया है।

तीसरा: बैठक का सबसे बड़ा फैसला आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों को लेकर बड़े आंदोलन का है। कांग्रेस का आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और विकास परियोजनाओं के नाम पर विस्थापन का दबाव बढ़ रहा है। इसी के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत बस्तर से करने का फैसला लिया गया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक इस आंदोलन में राहुल गांधी भी शामिल होंगे। हरिभूमि की रिपोर्ट के मुताबिक विक्रांत भूरिया ने बैठक में जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को लेकर बड़े आंदोलन का ऐलान किया और राहुल गांधी के शामिल होने की बात कही।

चौथा: कांग्रेस ने मांग की है कि आदिवासी क्षेत्रों में जनसुनवाई और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पेसा कानून और ग्रामसभा की भूमिका अनिवार्य की जाए। पार्टी का कहना है कि आदिवासी इलाकों में विकास परियोजनाओं और जमीन से जुड़े फैसलों में स्थानीय ग्रामसभा की भागीदारी और संवैधानिक अधिकारों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

पांचवा: विस्थापन, जल-जंगल-जमीन और खनिज संसाधनों के दोहन से प्रभावित लोगों की समस्याएं जानने के लिए 10 लोगों की एक टीम बनाने का फैसला लिया गया है। यह टीम अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर प्रभावित लोगों से मुलाकात करेगी, उनकी समस्याएं सुनेगी और उसके आधार पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।

छठवां: आदिवासी कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संगठन, संवैधानिक अधिकारों, आदिवासी मुद्दों और राजनीतिक लड़ाई के लिए तैयार करना बताया गया है।

CM विष्णु देव साय का पलटवार- कांग्रेस ने आदिवासियों को सिर्फ वोट बैंक समझा

आदिवासी कांग्रेस की बैठक और कांग्रेस के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कांग्रेस पर पलटवार किया।

26 अगस्त को जशपुर दौरे पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने लंबे समय तक आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल ने वास्तव में जनजातीय समाज के हित और विकास की चिंता की है, तो वह भाजपा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने आदिवासी समाज के लिए ठोस काम किए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस पर 50-60 वर्षों तक आदिवासी समाज को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा सरकार ने अनुसूचित जनजाति समाज के विकास और कल्याण के लिए काम किया है।

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के दौरान अनुसूचित जनजाति समाज के लिए अलग मंत्रालय का गठन किया गया था।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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