लेंस डेस्क। स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बीते दिनों महाराष्ट्र विधानमंडल की विशेषाधिकार समिति के सामने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर अपनी टिप्पणियों को लेकर माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी माफी अगर दिल से न हो तो वह बेकार है।
कामरा ने यह भी तर्क दिया कि माफी देने से दूसरे कलाकारों और उनकी अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खराब मिसाल कायम होगी।
यह पूरा मामला पिछले साल हेबिटेट कॉमेडी क्लब में हुई कामरा की परफॉर्मेंस से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने फिल्म ‘दिल तो पागल है’ के गाने की पैरोडी करते हुए शिंदे को “गद्दार” कहा था। यह टिप्पणी 2022 में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को तोड़कर शिंदे द्वारा की गई बगावत के संदर्भ में थी। इस पर शिंदे समर्थकों ने नाराजगी जताई थी और कुछ लोगों ने क्लब पर तोड़फोड़ भी की थी।
यह विवाद कामरा के एक व्यंग्यात्मक पैरोडी गाने ‘ठाणे की रिक्शा’ से शुरू हुआ, जिसमें कई लोगों ने शिंदे के राजनीति में आने से पहले ठाणे में ऑटो-रिक्शा चलाने वाले उनके पुराने पेशे पर कटाक्ष समझा। इस परफॉर्मेंस के बाद शिंदे समर्थकों में भारी नाराजगी हुई और महाराष्ट्र विधान परिषद में विशेषाधिकार भंग का प्रस्ताव भी लाया गया।
कामरा ने यह भी तर्क दिया कि अगर कलाकार हर विवाद पर माफी मांगने लगें, तो इससे क्रिएटिव फ्रीडम प्रभावित होगी और भविष्य में अन्य कलाकारों पर भी दबाव बढ़ेगा।
सूत्रों के मुताबिक, सुनवाई में उनसे पूछा गया—क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है? क्या वे माफी मांगेंगे? यहां तक कहा गया कि माफी देने पर मामला खत्म हो सकता है। लेकिन कुणाल कामरा हर बार अपने जवाब पर कायम रहे और माफी से इनकार किया।
कामरा का तर्क है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी, जिसे Article 19(1)(a) of the Indian Constitution में सुनिश्चित किया गया है, उसका इस्तेमाल कलाकारों को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि अगर कलाकार दबाव में आकर माफी मांगने लगेंगे, तो यह एक गलत परंपरा की शुरुआत होगी।
बहरहाल, इस मामले में पैनल की ओर से अंतिम फैसला आना बाकी है, लेकिन कामरा के इस रुख ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम जवाबदेही की बहस को तेज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि कुणाल कामरा पहले भी सरकार की फैक्ट-चेक यूनिट और ‘सहयोग पोर्टल’ जैसे मुद्दों को अदालत में चुनौती दे चुके हैं। अब मौजूदा विवाद में भी उन्होंने अपने रुख से पीछे हटने से इनकार किया है।
गुरुवार को कुणाल कामरा विधान भवन स्थित विशेषाधिकार समिति के सामने अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे थे। समिति के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने बताया कि भाजपा एमएलसी प्रवीण दारेकर की शिकायत पर यह मामला सामने आया था।
प्रसाद लाड ने कहा, “आज कुणाल कामरा की तीसरी या चौथी सुनवाई थी। आज हमें उनका बयान दर्ज करना था। प्रवीण दारेकर ने उन पर शिकायत की थी। आज क्रॉस-क्वेश्चनिंग का समय था। कामरा और दारेकर दोनों से सवाल-जवाब हुए। कामरा से 24 सवाल पूछे गए, जिनमें उन्होंने अपनी बातों को समझाने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने संविधान के अधिकारों और विशेषाधिकार समिति के अधिकार क्षेत्र के बारे में भी सवाल उठाए।”
इसके जवाब में कुणाल कामरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर अपनी माफी न मांगने की बात दोहराई।
उन्होंने लिखा, “आदरणीय सर, शायद कम्युनिकेशन में कुछ गड़बड़ी हो गई हो, लेकिन जैसा मुझे याद है, आज मेरी क्रॉस एग्जामिनेशन के आखिरी तीन सवाल ये थे। क्या आपको पछतावा है? जवाब: नहीं। क्या आपने जो कहा उस पर आपको अफसोस है? जवाब: नहीं। अगर आप बिना शर्त माफी मांग लें तो इस मामले को अलग तरीके से देखा जाएगा। जवाब: नहीं, मैं नहीं मांग सकता क्योंकि वह माफी ईमानदार नहीं होगी। इसके अलावा इससे दूसरे कलाकारों और उनकी आजादी के लिए बहुत खराब मिसाल कायम होगी।”










