नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि PM CARES फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF) से जुड़े किसी भी सवाल या मामले को संसद में नहीं उठाया जा सकता। PMO का कहना है कि ये फंड सरकारी बजट से नहीं चलते बल्कि लोगों के स्वैच्छिक दान से बने हैं इसलिए इनकी जिम्मेदारी सीधे सरकार पर नहीं है।
दरअसल इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 30 जनवरी को PMO ने लोकसभा सचिवालय को यह जानकारी दी।
PMO ने लोकसभा के नियमों 41(2)(viii) और 41(2)(xvii) का हवाला दिया। इन नियमों के मुताबिक सवाल ऐसे विषय पर नहीं हो सकते जो भारत सरकार का मुख्य सरोकार न हों। तर्क है कि ऐसे संगठनों या व्यक्तियों से जुड़े मामले नहीं उठाए जा सकते जिनकी जवाबदेही सरकार को सीधे न हो।
PMO ने कहा कि अगर कोई सांसद प्रश्न, जीरो आवर नोटिस या स्पेशल मेंशन के जरिए इन फंडों पर जानकारी मांगे तो नियमों के आधार पर उसकी मांग रद्द की जा सकती है।
इस फैसले पर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे तानाशाही और संसद के अपमान के रूप में देखा। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि सांसद जनता के प्रतिनिधि हैं उन्हें जनहित के सवाल पूछने से क्यों रोका जा रहा है? कांग्रेस पार्टी ने कई सवाल उठाए जैसे –
मोदी सरकार जनता के करोड़ों रुपये का हिसाब क्यों नहीं देना चाहती?
क्या अब संसद प्रधानमंत्री की मनमर्जी से चलेगी?
देश की जनता से क्या छिपाया जा रहा है?
कांग्रेस का कहना है कि यह सांसदों के अधिकारों पर हमला है और पारदर्शिता की कमी को और बढ़ावा देगा।
क्या है PM CARES फंड?
27 मार्च 2020 को कोविड-19 महामारी के दौरान PM CARES फंड शुरू हुआ। यह एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है जो आपात स्थिति में राहत के लिए दान इकट्ठा करता है। प्रधानमंत्री अध्यक्ष हैं और कुछ मंत्री ट्रस्टी। यह RTI के दायरे में नहीं आता और CAG ऑडिट भी नहीं होता। 2022-23 तक इसमें करीब 6,283 करोड़ रुपये जमा थे।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF): जनवरी 1948 में शुरू हुआ। प्राकृतिक आपदाओं, हादसों या दंगों में पीड़ितों के परिवारों को तुरंत मदद देता है। यह भी स्वैच्छिक दान से चलता है।
राष्ट्रीय रक्षा कोष (NDF): सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों व उनके परिवारों की मदद के लिए। प्रधानमंत्री अध्यक्ष और रक्षा, वित्त, गृह मंत्री सदस्य होते हैं जो मुख्य रूप से दान पर आधारित है ।
पहले से चल रहे विवाद
PM CARES फंड की शुरुआत से ही पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। कई लोग पूछते हैं कि इतने बड़े फंड पर संसद या CAG की जांच क्यों नहीं होती? 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) से अलग माना था। PSU कंपनियों से बड़े दान आए, लेकिन सरकार का रुख यही रहा कि यह सरकारी फंड नहीं, बल्कि चैरिटेबल ट्रस्ट है। यह फैसला एक बार फिर संसद में जवाबदेही और पारदर्शिता पर बहस छेड़ रहा है। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है जबकि सरकार नियमों के आधार पर अपना पक्ष रख रही है।










