रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नकटी गांव (Nakti) में 29 जून को हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासी संग्राम बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस की ओर से नकटी मामले की जांच के लिए बनाई गई फाइंडिंग कमेटी सामने आई और भाजपा सरकार पर एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाए।
कांग्रेस ने नकटी में हुई कार्रवाई को सरकार का ‘अपराधिक कृत्य’ बताते हुए कहा कि गरीबों को बिना पुनर्वास के बरसात में बेघर किया गया और सरकार अब अपनी गलती छिपाने के लिए रोज नए दावे कर रही है।
एक दिन पहले वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि पूरी प्रक्रिया कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई थी और कांग्रेस जनता को गुमराह कर सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जिस भूमि को लेकर आज कांग्रेस राजनीति कर रही है, उसके आबंटन की प्रक्रिया 1 सितंबर 2020 से तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रारंभ हुई थी। राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट उल्लेख है कि यह भूमि हाउसिंग बोर्ड को आबंटित किए जाने के लिए प्रस्तावित थी। आबंटन के लिए भूमि चिन्हित होने के बाद वहां लगातार अवैध कब्जे बढ़ते गए और लगभग 3 हेक्टेयर से बढ़कर 15 हेक्टेयर तक अतिक्रमण फैल गया।
वन मंत्री के आरोपों पर कांग्रेस की फाइंडिंग कमेटी ने राजीव भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के हर दावे पर सवाल खड़े कर दिए।
कांग्रेस की फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने नकटी में हुई बुलडोजर कार्रवाई को भाजपा सरकार का “अपराधिक कृत्य” बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के गरीब परिवारों के घर तोड़ दिए गए। वह भी ऐसे समय, जब प्रदेश में मानसून शुरू हो चुका है।
धनेंद्र साहू ने कहा कि सरकार गरीबों के घरों को अवैध बता रही है, लेकिन उसी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान भी बनाए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जमीन अवैध थी तो वहां प्रधानमंत्री आवास, बिजली कनेक्शन, राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसी सरकारी सुविधाएं कैसे दी गईं?
इसे लेकर राज्यपाल रामेन डेका से मुलाकात का समय मांगा गया था। राज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप कर नकटी के पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की जाएगी। उसके बाद आगे आंदोलन की रूप रेखा तैयार की जाएगी।
कांग्रेस के रायपुर शहर अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन का दावा है कि कार्रवाई में 85 मकान तोड़े गए, जिनमें 25 से अधिक प्रधानमंत्री आवास भी शामिल हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास टूटने के बाद अब इन हितग्राहियों को दोबारा योजना का लाभ भी नहीं मिलेगा। कमेटी का आरोप है कि आधी रात को पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर लोगों को अपना सामान तक निकालने का मौका नहीं दिया गया।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने वन मंत्री केदार कश्यप के उस बयान को भी चुनौती दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि वहां विधायक कॉलोनी बनाने का कोई फैसला नहीं हुआ है।
सुशील आनंद शुक्ला ने दावा किया कि अक्टूबर 2024 में आवास एवं पर्यावरण विभाग की ओर से कलेक्टर रायपुर को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से षष्ठम विधानसभा के जनप्रतिनिधियों के लिए आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नकटी की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार अपने ही विभागीय दस्तावेजों से मुकर रही है।
पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि ओपी चौधरी जब रायपुर कलेक्टर थे, तब भी उन्होंने कई जगहों पर इस तरह की कार्रवाई कराई थी और पुनर्वासित लोगों की दुकानें तोड़ी थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पहले गरीबों के घर तोड़े और बाद में पुनर्वास की व्यवस्था की। उनका कहना है कि जिन परिवारों को बसाया गया है, वहां एक कमरे के मकान में 20 से 25 लोगों को रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है और मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए कांग्रेस ने साफ किया है कि यदि सरकार इस मामले में कार्रवाई नहीं करती तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
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