नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा पर जारी तनाव के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत सिंह कपूर के एक भाषण का वीडियो आधिकारिक यूट्यूब और सोशल मीडिया चैनलों से हटा दिया गया है। करीब एक घंटे से अधिक लंबा यह वीडियो 22 अक्टूबर 2026 को अलवर में दिए गए उनके एक संबोधन का था। वीडियो हटाए जाने के बाद देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और सरकार की सीमा नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
अपने संबोधन में महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मौजूदा स्थिति का जिक्र किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर चीनी सेना के साथ आमना-सामना (face-offs) और तनाव की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गश्ती मार्गों (patrolling routes) को लेकर सीमावर्ती क्षेत्रों में अभी भी अशांति बनी हुई है। आईटीबीपी प्रमुख का यह बयान सरकार के उस रुख से अलग नजर आया, जिसमें सीमा पर स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया जाता रहा है।
वीडियो के अचानक गायब होने पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित कई विपक्षी नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि आखिर देश के सुरक्षा बल के प्रमुख के बयान को क्यों सेंसर किया गया? विपक्ष का आरोप है कि सरकार देश की जनता से चीन सीमा की वास्तविक स्थिति को छिपाना चाहती है। विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए और देश को सच बताना चाहिए।
दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक सूत्रों या सरकार की तरफ से अभी तक कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं आया है। हालांकि, रक्षा और सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से कई बार ऐसे संवेदनशील वीडियो को सार्वजनिक डोमेन से हटा लिया जाता है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार यह दोहराती रही हैं कि भारतीय सेना मुस्तैदी से सीमा पर डटी है और देश की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया गया है। वर्तमान में सीमा पर किसी भी नए अतिक्रमण की खबरों का खंडन किया गया है, लेकिन वीडियो हटाने की इस घटना ने पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।







