आगरा। उत्तरप्रदेश के आगरा में BJP के पार्षद किशन नायक का विरोध प्रदर्शन इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना है। अपने जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने घुटनों तक गंदे नाले में उतरकर केक काटा और नगर निगम की कार्यशैली के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
उनका कहना है कि जिस नाले की समस्या को लेकर वे लंबे समय से शिकायत करते आ रहे हैं, उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने दावा किया कि इस नाले में गिरकर क्षेेत्र में रहने वालो को गंभीर छोटे आईं हैं और 15 से अधिक बार मेयर, नगर आयुक्त तथा संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। उनका कहना है कि जनता जिन परेशानियों के बीच जी रही है, उसी पीड़ा को महसूस कराने के लिए उन्होंने अपना जन्मदिन भी उसी माहौल में मनाने का फैसला किया।
किशन नायक का यह विरोध इसलिए भी अलग माना जा रहा है क्योंकि वह विपक्ष के नहीं बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षद हैं। आमतौर पर सरकार के जनप्रतिनिधि अपनी सरकार की उपलब्धियों को सामने रखते हैं, लेकिन यहां एक भाजपा पार्षद अपनी ही व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता नजर आया।
कई लोगों ने इसे जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी निभाने का साहसिक प्रयास बताया है, जबकि कई लोगों का कहना है कि यदि सत्ताधारी दल के नेताओं को भी अपनी बात मनवाने के लिए नाले में उतरना पड़े, तो यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी है।
पार्षद ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से नाले की वास्तविक सफाई नहीं हुई और केवल कागजों में काम दिखाया जाता रहा।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे राजनीतिक माहौल को गर्मा रही हैं। सरकार विकास और बुनियादी सुविधाओं को अपनी बड़ी उपलब्धि बताती रही है, लेकिन आगरा की यह घटना उन दावों पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है।
यदि स्थानीय जनप्रतिनिधि ही अपनी जनता की समस्याओं को लेकर इस तरह विरोध करने पर मजबूर हों, तो यह केवल एक नाले का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन जाता है।
लोगों के बीच भी यही चर्चा है कि विकास के दावों के साथ-साथ जमीनी समस्याओं का समाधान भी उतनी ही गंभीरता से होना चाहिए। किशन नायक का यह विरोध फिलहाल पूरे प्रदेश में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और स्थानीय विकास को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।








