नई दिल्ली। Bank of Baroda के शेयर बुधवार को निवेशकों के लिए बड़ा झटका लेकर आए। बैंक के शेयरों में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह बैंक द्वारा अबू धाबी स्थित NMC हेल्थ से जुड़े लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद का चौंकाने वाला समझौता था।
इस कंपनी को एक भारतीय व्यवसाय वी आर शेट्टी ने स्थापित किया था । इस खबर के बाद निवेशकों ने शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी और BSE पर बैंक का शेयर 11.40 रुपये यानी 4.20 फीसदी टूटकर 260.25 रुपये पर बंद हुआ।
कौन है बीआर शेट्टी
जब पीएम मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ऐतिहासिक दौरे किए, तो वहां के प्रमुख भारतीय प्रवासी उद्योगपति होने के नाते NMC के मालिक बी. आर. शेट्टी ने उनके स्वागत और द्विपक्षीय बिजनेस फोरम के आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अबू धाबी में बने पहले हिंदू मंदिर की स्थापना और उसके लिए यूएई सरकार से जमीन मिलने की शुरुआती प्रक्रियाओं व समन्वय में भी बी. आर. शेट्टी सक्रिय रूप से जुड़े रहे, जो पीएम मोदी के कूटनीतिक प्रयासों का एक बड़ा हिस्सा था।
क्या था घोटाला
साल 2020 में कंपनी के संस्थापक बी. आर. शेट्टी और उनके प्रबंधन द्वारा करीब 4 से 5 अरब डॉलर का छुपा हुआ कर्ज और भारी वित्तीय धोखाधड़ी सामने आने के बाद यह कंपनी पूरी तरह डिफाल्टर और दिवालिया हो गई थी।
अदालत के बाहर किया समझौता
बैंक ऑफ बड़ौदा ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि उसने NMC हेल्थ PLC, NMC हेल्थकेयर लिमिटेड और NMC होल्डिंग लिमिटेड के संयुक्त प्रबंधकों के साथ अदालत के बाहर समझौता कर लिया है। इस समझौते के तहत बैंक ने 600 मिलियन डॉलर यानि करीब 5,700 करोड़ रुपये का भुगतान करने पर सहमति जताई है।
क्या कह रहा बैंक ऑफ बड़ौदा
बैंक का कहना है कि यह समझौता सालों से चल रहे कानूनी विवाद को हमेशा के लिए खत्म करने के उद्देश्य से किया गया है।यह मामला अबू धाबी और इंग्लैंड ए में चल रही उन कानूनी कार्यवाहियों से जुड़ा था, जो NMC ग्रुप की दिवालिया प्रक्रिया के संबंध में थीं। अब समझौते के बाद अबू धाबी की अदालत में चल रही कार्यवाही बंद कर दी गई है, जबकि इंग्लैंड की अदालत में मामला खत्म करने की प्रक्रिया जारी है।
बैंक ने गलती मानने से किया इनकार
बैंक ने अपने बयान में साफ किया कि इस समझौते का मतलब यह नहीं है कि उसने किसी भी तरह की गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार की है। बैंक के अनुसार, दोनों पक्षों ने बिना किसी दोष या गलत काम को स्वीकार किए सभी दावों और कानूनी विवादों को समाप्त करने पर सहमति बनाई है। साथ ही समझौते की अन्य शर्तों को गोपनीय रखा गया है।
बैंक ने अदा की राशि
बैंक ऑफ बड़ौदा ने यह भी बताया कि इस पूरे मामले में उसकी वित्तीय जिम्मेदारी केवल 600 मिलियन डॉलर के तय भुगतान तक सीमित है। यह राशि बैंक की अबू धाबी शाखा द्वारा अदा की जा चुकी है।बैंक के मुताबिक, इस समझौते का सबसे बड़ा उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले मुकदमों, अनिश्चितता और उससे जुड़े भारी कानूनी खर्च से बचना है।
निवेशकों में भगदड़
हालांकि, निवेशकों ने इस खबर को शुरुआती तौर पर नकारात्मक माना, क्योंकि 5,700 करोड़ रुपये जैसी बड़ी रकम का भुगतान बैंक के लिए एक बड़ा वित्तीय कदम है। इसी वजह से शेयर बाजार में बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों पर दबाव देखने को मिला।
बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर प्रदर्शनबैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर गुरुवार को भारी दबाव में रहे। NSE पर बैंक का शेयर 11.80 रुपये यानी 4.34% की गिरावट के साथ 259.85 रुपये पर बंद हुआ। NMC हेल्थ मामले में करीब 5,700 करोड़ के सेटलमेंट की घोषणा के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली और बिकवाली की, जिससे शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली।










