नई दिल्ली। सौरमंडल से बाहर किसी ग्रह से सीधे आने वाले रेडियो उत्सर्जन का पहली बार पता लगाने का दावा किया गया है। तो सवाल आया की क्या Aliens धरवासियों से बात करने का प्रयास कर रहे हैं? इसका जवाब ढूंढ़ने के लिए खगोलविदों की एक टीम ने करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर स्थित गैस जायंट ग्रह बीटा पिक्टोरिस-बी से रेडियो उत्सर्जन दर्ज किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह उत्सर्जन ग्रह के चारों ओर बनने वाले प्राकृतिक ऑरोरा यानी ध्रुवीय प्रकाश से जुड़ा है।
पहली बार ग्रह से सिग्नल की सीधी पहचान
यह खोज इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले एक्सोप्लैनेट सिस्टम से रेडियो उत्सर्जन के संकेत तो मिले थे, लेकिन यह साफ तौर पर तय करना मुश्किल था कि सिग्नल ग्रह से आ रहा है या उसके आसपास मौजूद तारे से। नए अध्ययन में रेडियो स्रोत की स्थिति बीटा पिक्टोरिस-बी से मेल खाती मिली है। अध्ययन के मुताबिक यह स्रोत उसके तारे और दूसरे ग्रह बीटा पिक्टोरिस-सी से अलग पाया गया।

इस अध्ययन का नेतृत्व केविन एन. ऑर्टिज सेबालोस ने किया है। टीम में हार्वर्ड एंड स्मिथसोनियन के सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के एडो बर्जर और यूनिवर्सिटी ऑफ ओरेगन की यवेट कैंडेस भी शामिल हैं। अध्ययन 15 सितंबर 2026 को arXiv पर प्रीप्रिंट के रूप में जारी किया गया है और अभी इसकी औपचारिक पीयर रिव्यू प्रक्रिया बाकी है।
MeerKAT ने पकड़ी रेडियो तरंगें
वैज्ञानिकों ने दक्षिण अफ्रीका में स्थित MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप एरे से बीटा पिक्टोरिस-बी का अध्ययन किया। फरवरी 2025 से मई 2026 के बीच चार मौकों पर किए गए अवलोकनों में 0.85 से 3.5 गीगाहर्ट्ज तक रेडियो उत्सर्जन दर्ज किया गया।

शोधकर्ताओं के मुताबिक सिग्नल लगातार एक जैसी आवाज नहीं था, बल्कि तेजी से दोहराने वाले और अत्यधिक सर्कुलर पोलराइज्ड रेडियो बर्स्ट के रूप में दिखाई दिया। इनके बीच हल्का स्थायी रेडियो उत्सर्जन भी दर्ज किया गया।
ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र का भी मिला संकेत
अध्ययन की सबसे अहम बात इसका चुंबकीय क्षेत्र से संबंध है। वैज्ञानिकों ने रेडियो उत्सर्जन को इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन मेजर इंस्टेबिलिटी (ECMI) से जोड़ते हुए कहा है कि इसकी अधिकतम आवृत्ति ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत का संकेत देती है।
अध्ययन के अनुसार 3.5 गीगाहर्ट्ज तक उत्सर्जन मिलने से बीटा पिक्टोरिस-बी के उत्सर्जन क्षेत्र में चुंबकीय क्षेत्र की ताकत कम से कम 1.25 किलो-गॉस होने का अनुमान निकलता है। शोधकर्ताओं ने इसे किसी एक्सोप्लैनेट के चुंबकीय क्षेत्र की ताकत का पहला प्रत्यक्ष मापन बताया है।
63 प्रकाश वर्ष दूर है बीटा पिक्टोरिस सिस्टम
बीटा पिक्टोरिस-बी एक युवा गैस दानव ग्रह है, जो बीटा पिक्टोरिस तारे की परिक्रमा करता है। यह पूरा सिस्टम पृथ्वी से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर है। युवा होने और इसके आसपास मौजूद धूल-गैस की डिस्क के कारण यह लंबे समय से ग्रहों के निर्माण और उनके विकास को समझने के लिए खगोलविदों की रुचि का केंद्र रहा है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्रह का मजबूत चुंबकीय क्षेत्र उसके वायुमंडल और तारकीय हवाओं के साथ होने वाली प्रक्रियाओं को समझने में मदद कर सकता है।
एलियन संदेश नहीं, प्राकृतिक ऑरोरा का संकेत
रेडियो सिग्नल का नाम सामने आते ही एलियन या किसी कृत्रिम संदेश की चर्चा शुरू हो सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों की व्याख्या इससे अलग है। उपलब्ध अध्ययन और विशेषज्ञ कवरेज के मुताबिक यह प्राकृतिक ऑरोरल रेडियो उत्सर्जन है, जिसे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र और आवेशित कणों की गतिविधि से जोड़ा गया है।

हालांकि यह खोज महत्वपूर्ण है, लेकिन अध्ययन अभी प्रीप्रिंट स्तर पर है। आगे के अवलोकन और स्वतंत्र अध्ययन यह तय करने में मदद करेंगे कि रेडियो उत्सर्जन और ग्रह के तेज घूर्णन के बीच संबंध कितना मजबूत है। फिलहाल शोधकर्ताओं के लिए यह खोज सौरमंडल के बाहर किसी ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।











