अनूपपुर। देश के प्रसिद्ध लेखक और सीतापुर के इलाकेदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले उदय प्रताप सिंह के घर पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है, यही सड़क उदय प्रकाश के घर के सामने से गुजरकर वृद्धाश्रम को जाती है। लेखक उदय प्रकाश पहले सड़क बनाने के लिए जमीन देने को राजी नहीं थे लेकिन, अब वो मान चुके हैं तब प्रशासन वृद्धाश्रम की राह को ठंडे बस्ते में डाल चुका है।
इलाकेदार का घर और वृद्धाश्रम का रास्ता

अनूपपुर जिला के कलेक्ट्रेट परिसर से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर सीतापुर पहुंचने के लिए एक कच्ची सड़क जाती है, यही रास्ता देश के जाने माने साहित्यकार उदय प्रकाश के घर होते हुए वृद्धाश्रम की ओर जाता है। साथ ही यही सड़क हर साल मकर संक्रांति में लगने वाले मेले तक भी जाती है।
यह इलाका पूर्व जमींदार परिवार उदय प्रकाश की पट्टे की जमीन पर है। स्वाभाविक है कि सड़क का रास्ता भी उन्हीं की जमीन पर है। कई वर्षों से इस सड़क का नव निर्माण करने की तैयारी की जा रही है लेकिन, सड़क आज तक बदहाल हालत में है। बरसात के समय इस सड़क की दुर्दशा ग्रामीणों को गांव में कैद रहने को मजबूर कर देती है।
साहित्यकार ने लगाया था सड़क बनाने में अड़ंगा
जब रिपोर्टर सीतापुर में ग्रामीणों से बात करने पहुंचा तो ग्रामीण खुलकर बात करने को तैयार नहीं हुए। फिर भी कुछ ग्रामीणों ने बातचीत में बताया कि उदय प्रकाश सिंह का परिवार इस इलाके के पूर्व जमींदार हैं और सड़क वाली जमीन भी उन्हीं के पट्टे में आती है, इसलिए वे इस सड़क को बनने नहीं दे रहें हैं।
कई बार सरपंच और सचिव ने बातचीत की थी लेकिन वे नहीं माने। हम ग्रामीण भी उनसे बातचीत करने में हिचकिचाते हैं। सालों से हम इसी कच्ची सड़क का इस्तेमाल करते हैं, गर्मी के दिनों में धूल और बरसात के दिनों में यह कच्ची सड़क कीचड़ बड़े गड्ढों में बदल जाती है।
जमींदार की हां तो प्रशासन की ना

सड़क के मसले को लेकर रिपोर्टर से बरबसपुर ग्राम पंचायत के सरपंच बिसाहुलाल कोल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि यह सड़क लंबे समय से बनवाने की तैयारी की जा रही है। यह सड़क सीधे मेला ग्राउंड और वृद्धाश्रम की ओर जाती है।
चूंकि यह सड़क की जमीन पूर्व जमींदार परिवार के पट्टे की जमीन है तो उन्होंने सड़क बनाने के लिए मंजूरी नहीं दी थी। लेकिन, लेकिन बातचीत करने के बाद उन्होंने अब सड़क बनवाने की परमिशन दे दी है। हमने कई बार कलेक्टर को ज्ञापन देकर सड़क बनाने की मांग की है। किंतु प्रशासन सड़क बनाने में किसी प्रकार की रुचि नहीं ले रहा है। गांव के लोग सालों से इसी सड़क का इस्तेमाल कर रहें हैं।
हम भी चाहते हैं जल्द सड़क बने

द लेंस से फोन पर हुई बातचीत में लेखक उदय प्रकाश जी ने बताया कि हम भी वर्षों से चाहते हैं इस सड़क का निर्माण हो जाए और लोगों की कम से कम एक समस्या कम हो जाए, हमारी भी जमीन इस सड़क के रास्ते में आती है। हम उस सड़क के लिए जमीन और जो सहयोग होगा वो देने के लिए तैयार हैं। लेकिन, प्रशासन को भी इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। रेत ठेकेदारों द्वारा लगातार इस सड़क का दोहन किया गया। लेकिन, इस सड़क को बनाने के लिए कभी कोई आगे नहीं आया। अभी रेत खदान बंद कर दी गई है, जब खदान चालू थी तब लोगों को और भी समस्याएं हुआ करती थीं।
रेत ठेकेदारों से भी हो चुकी है गहमागहमी
लेखक उदय प्रकाश के घर के पीछे सोन नदी बहती है। सोन नदी में रेत के भंडार है। इसी इलाके में रेत का टेंडर 2021– 22 में हुआ था और सीतापुर जाने वाली सड़क से ही रेत का परिवहन किया जा रहा था। जिसे लेकर लेखक के परिवार ने आपत्ति जताई थी। जिसके बाद रेत ठेकेदारों और लेखक परिवार के बीच गहमागहमी हुई थी। फिलहाल इस इलाके से रेत का परिवहन बंद कर दिया गया है।
नेताओं और अधिकारियों का आए दिन आना– जाना फिर भी सड़क नहीं
सीतापुर में सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग द्वारा शासकीय कल्याण वृद्धाश्रम ग्राम सीतापुर ग्रा. पंचायत बरबसपूर में संचालित है। यहां आए दिन नेता, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों का दौरा होता है। फिर भी इस सड़क के निर्माण के लिए किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में यह सड़क बन पाती या हालत ऐसे ही रहते हैं।
कौन हैं उदय प्रकाश?
उदय प्रकाश चर्चित कवि, कथाकार, पत्रकार और फिल्मकार हैं। आपकी कुछ कृतियों के अंग्रेजी, जर्मन, जापानी एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद भी उपलब्ध हैं। लगभग समस्त भारतीय भाषाओं में रचनाएं अनूदित हैं। इनकी कई कहानियों के नाट्यरूपंतर और सफल मंचन हुए हैं। ‘उपरांत’ और ‘मोहन दास’ के नाम से इनकी कहानियों पर फीचर फिल्में भी बन चुकी हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं।
उदय प्रकाश स्वयं भी कई टी.वी.धारावाहिकों के निर्देशक-पटकथाकार रहे हैं।उदय प्रकाश जी ने 2015 में कन्नड़ साहित्यकार एम एम कलबुर्गी की हत्या और बढिती असहिष्णुता के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया था।








