अडानी को अपना पावर प्लांट गंवाने के बाद केंद्रीय एजेंसियों के चंगुल से छुटे बुखारी बोले मेरी फैक्ट्री मेरा बच्चा था


नई दिल्ली। अहमद बुखारी एनर्जी सेक्टर में कोई छोटा नाम नहीं है। कोस्टल एनर्जी और कोस्टल एनर्जेन प्राइवेट लिमिटेड (सीईपीएल) के प्रमोटर बुखारी अपनी तीन एजेंसियों के खिलाफ आठ साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पूरी तरह बरी कर दिए गए हैं। चेन्नई की स्पेशल कोर्ट ने 28 अप्रैल, 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत सभी लंबित कार्यवाहियों को औपचारिक रूप से बंद कर दिया।

केन्द्रीय एजेंसियों पर सवाल

कोर्ट ने कहा कि जब मूल अपराध नहीं बचता, तो उस पर आधारित मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी नहीं टिक सकता। इस आदेश के साथ अहमद बुखारी के खिलाफ डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) द्वारा शुरू किए गए सभी मामले समाप्त हो गए हैं। अहमद बुखारी के साथ जो हुआ उसको लेकर चर्चा का बाजार गर्म है केंद्र सरकार की एजेंसियों और अदानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

2018 में शुरू हुआ था मामला

दरअसल बुखारी के खिलाफ मामला 2018 में शुरू हुआ था, जब डीआरआई ने आरोप लगाया कि कोस्टल एनर्जी ने पब्लिक सेक्टर की कंपनी एनटीपीसी को कम कैलोरी वाले कोयले की आपूर्ति बढ़ी हुई कीमत पर की थी। सीबीआई ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया। इसके बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत कार्यवाही शुरू की और आरोप लगाया कि लगभग ₹564 करोड़ की राशि विदेशी शेल कंपनियों के माध्यम से घुमाई गई थी।अहमद बुखारी को मार्च 2022 में गिरफ्तार किया गया था और वे 31 महीने जेल में रहे। उनकी छह जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं। अंत में 24 अक्टूबर, 2024 को उन्हें जमानत मिली लेकिन तब तक उनकी कंपनी पहले ही मालिकाना बदल चुकी थी।

41 महीने की हुई थी जेल

जबकि बुखारी जेल में थे, कोस्टल एनर्जेन को दिवालियापन कार्यवाही के तहत रख दिया गया था। फरवरी 2024 में, कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया ने डिकी अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (DAIT) और अदानी पावर लिमिटेड के कंसोर्टियम द्वारा सीईपीएल की 100 फीसदी इक्विटी हासिल करने की मंजूरी दे दी। 30 अगस्त, 2024 को चेन्नई बेंच ऑफ एनसीएलटी ने रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी। अगले दिन अदानी पावर ने स्पेशल पर्पज व्हीकल मोक्सी पावर जेनरेशन लिमिटेड के माध्यम से अधिग्रहण पूरा होने की घोषणा की, जिसमें कोस्टल एनर्जेन को विलय कर दिया गया और भंग कर दिया गया।

बुखारी ने दी थी अधिग्रहण को चुनौती

बुखारी और अन्य निलंबित डायरेक्टर्स ने अधिग्रहण को चुनौती दी और अनियमितताओं का आरोप लगाया। एनसीएलएटी ने सितंबर 2024 में संक्षिप्त रूप से स्टेटस क्वो का आदेश दिया और इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को जिम्मेदारी सौंपी। सुप्रीम कोर्ट ने कंसोर्टियम की तत्काल याचिका पर उस आदेश को रद्द कर दिया और अदानी-डेइटी को स्वतंत्र रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के अधीन और कुछ शर्तों के साथ प्लांट चलाने की अनुमति दे दी।

अब भी न्याय पर भरोसा

दिवालियापन चुनौती अभी भी एनसीएलएटी के समक्ष लंबित है। 18 मई, 2026 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए बुखारी ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा: “मुझे विश्वास है कि मुझे पावर प्लांट वापस मिल जाएगा — जो मेरा बच्चा है। मुझे न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।”यह उल्लेखनीय है कि अहमद बुखारी को 2024 के सबसे प्रभावशाली भारतीय मुसलमानों में से एक घोषित किया गया था।

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