होर्मुज के बाद अब महासागरों पर ट्रम्प की नजर, प्रशांत या अटलांटिक का नाम बदलकर रख सकते हैं ‘ट्रम्प ओशन’

Donald Trump

लेंस डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने अनोखे और चौंकाने वाले बयानों को लेकर एक बार फिर चर्चा में हैं। गल्फ ऑफ मेक्सिको और लेक ओंटारियो के नाम बदलने के बाद, अब उन्होंने दुनिया के प्रमुख महासागरों के नाम बदलने का संकेत दिया है। ट्रम्प ने एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि वह 2028 में अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले प्रशांत (Pacific) या अटलांटिक (Atlantic) महासागर का नाम बदलकर ‘ट्रम्प ओशन’ या ‘ओशन ऑफ द अमेरिका’रखना चाहते हैं।

शनिवार को एक रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने मुस्कुराते हुए कहा कि अमेरिका के पास पहले से एक गल्फ और एक लेक का नया नाम है, अब उन्हें एक बड़ी नदी और एक महासागर का नाम बदलना है। ट्रम्प के इस सुझाव के बाद रैली में मौजूद भीड़ ने तालियों और ठहाकों के साथ उनका स्वागत किया।

स्ट्रीट ऑफ होर्मुज पर भी जता चुके हैं दावा

यह पहला मौका नहीं है जब ट्रम्प ने किसी भौगोलिक क्षेत्र का नाम बदलने की बात कही हो। इससे पहले वे सोशल मीडिया पर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को अमेरिकी प्रभाव वाला क्षेत्र बताते हुए सवाल उठा चुके हैं कि क्या इसका नाम बदलकर ‘ट्रम्प स्ट्रीट’ कर देना चाहिए।

पहले भी विवादों में रहे हैं नाम बदलने के फैसले

डोनाल्ड ट्रम्प अपने पिछले फैसलों के जरिए भौगोलिक नामों को अमेरिकी पहचान से जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं:

‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ बना ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ : ट्रम्प प्रशासन ने मेक्सिको की खाड़ी का आधिकारिक अमेरिकी नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ कर दिया था। इस कदम से मेक्सिको के साथ कूटनीतिक संबंधों में खटास आ गई थी। इसके अलावा, प्रसिद्ध समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) द्वारा इस नए नाम को अपनाने से इनकार करने पर व्हाइट हाउस और मीडिया के बीच कानूनी खींचतान भी देखने को मिली थी।

‘लेक ओंटारियो’ बनी ‘लेक अमेरिका’ : अमेरिका और कनाडा की सीमा पर स्थित ‘लेक ओंटारियो’ का नाम बदलकर ट्रम्प ने ‘लेक अमेरिका’ कर दिया। कनाडा के साथ व्यापार और टैरिफ (Tariff) विवाद के बीच उठाए गए इस कदम ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया था।

क्या वाकई बदला जा सकता है महासागर का नाम?

अंतरराष्ट्रीय समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि किसी राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश (Executive Order) से केवल अमेरिकी संघीय दस्तावेजों में नाम बदला जा सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और वैश्विक महासागरों के नाम तय करने का अधिकार इंटरनेशनल हाइड्रोग्राफिक ऑर्गेनाइजेशन (IHO) जैसी वैश्विक संस्थाओं के पास होता है। ऐसे में दुनिया के अन्य देश इन नए नामों को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

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