मध्यप्रदेश में फर्जी IAS-IPS का जाल! कोई बना कलेक्टर तो किसी ने बांटे फर्जी जॉइनिंग लेटर

भोपाल। मध्यप्रदेश में खुद को IAS और IPS अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने के कई मामले सामने आए हैं। इन मामलों में आरोपी कभी कलेक्टर, कभी IPS अधिकारी तो कभी केंद्र सरकार का बड़ा अफसर बनकर लोगों पर रौब जमाते रहे। पुलिस ने हाल के मामलों में ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि कुछ आरोपियों ने नौकरी दिलाने, सरकारी विभाग में नियुक्ति कराने और होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठे।

इन आरोपियों की कहानी में एक बात समान रही—अधिकारी बनने का दिखावा, सरकारी नाम-पद का इस्तेमाल और लोगों को भरोसे में लेकर ठगी।

केस 1: खुद को MPSTDC का एडिशनल डायरेक्टर बताया

ताजा मामला तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़ा है। आरोप है कि वह खुद को IAS अधिकारी और मध्यप्रदेश टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSTDC) की एडिशनल डायरेक्टर बताती थी। वह लाल नंबर प्लेट लगी इनोवा कार से चलती थी और लोगों पर अधिकारी होने का प्रभाव डालती थी।

जांच के दौरान उसके घर से महंगे आईफोन, होटल के बिल, फ्लाइट टिकट और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, उसके पास मंत्रालय और IAS अधिकारियों के नामों की सूची भी रहती थी, जिनका नाम लेकर वह खुद को प्रभावशाली अधिकारियों का करीबी बताती थी।

तृप्ति के खिलाफ चार मामले दर्ज बताए गए हैं। इनमें स्कूल संचालक से करीब 1.60 लाख रुपये की कथित ठगी, सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 5 लाख रुपये लेने और MPT के होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर करीब 39.17 लाख और 49.80 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले शामिल हैं।

केस 2: चाय की टपरी से सोशल मीडिया पर फर्जी IPS तक

दूसरा मामला ग्वालियर से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोपी कभी दिल्ली के मुखर्जी नगर में कोचिंग सेंटर के बाहर चाय की दुकान चलाता था। आरोप है कि बाद में उसने खुद को IPS अधिकारी बताना शुरू कर दिया।

2020 में UPSC का परिणाम आने के बाद उसने कथित तौर पर सोशल मीडिया पर अपना नाम चयन सूची में जोड़ लिया और अपने नाम के साथ IPS लिखना शुरू कर दिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर उसके हजारों फॉलोअर्स हो गए।

पुलिस के मुताबिक, उसने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क किया और ठगी शुरू की। एक महिला डॉक्टर से उसकी मां के इलाज के नाम पर 25 हजार रुपये लेने का आरोप है। शिकायत के बाद दिल्ली साइबर सेल की कार्रवाई में उसकी कथित पहचान सामने आई। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए 50 से ज्यादा लोग ठगी का शिकार हुए और रकम 14 लाख रुपये से अधिक बताई गई।

केस 3: नौकरी के नाम पर फर्जी जॉइनिंग लेटर

तीसरे मामले में झांसी निवासी ऋषि कुमार यादव पर खुद को 2016 बैच का IPS अधिकारी और इनकम टैक्स विभाग का असिस्टेंट इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर बताकर ठगी करने का आरोप है।

बताया गया कि आरोपी UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों को इनकम टैक्स विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देता था और प्रत्येक उम्मीदवार से करीब एक लाख रुपये की मांग करता था। आरोप है कि उसने पुराने पहचान पत्र में बदलाव कर फर्जी आईडी कार्ड और जॉइनिंग लेटर भी तैयार किए।

छात्रों को दिए गए कथित जॉइनिंग लेटर में कई गलतियां थीं। शिकायत मिलने के बाद भोपाल की MP नगर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया।

केस 4: गुजरात में फर्जी थानेदार, इंदौर में बना कलेक्टर

चौथा मामला इंदौर का है। हिमांशु पांचाल पर पहले गुजरात में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर वसूली करने का आरोप लगा था। वहां कार्रवाई के बाद वह इंदौर आया।

पुलिस के अनुसार, उसने पॉश इलाके में घर लिया और बाहर ‘IAS राज सोनी, जिला कलेक्टर’ नाम की नेम प्लेट लगा दी। उसने किराए की इनोवा कार पर भी कलेक्टर जैसी नंबर प्लेट लगाई।

आरोप है कि एक होटल में ड्राइवरों के परिवार के लिए पार्टी आयोजित करने के बाद करीब 16 हजार रुपये का बिल आया। रजिस्टर में उसने कथित तौर पर ‘IAS राज सोनी’ लिखा और कहा कि उसका पीए बिल चुका देगा। होटल प्रबंधन को शक होने पर पुलिस को सूचना दी गई और लसूड़िया पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई कि वह ड्राइवरों को सरकारी नौकरी दिलाने और जल्द अपनी पोस्टिंग होने का भरोसा देता था।

केस 5: खुद को केंद्र सरकार का संयुक्त सचिव बताया

पांचवां मामला उज्जैन के महाकाल मंदिर से जुड़ा है। दिल्ली निवासी अतुल कुमार पर खुद को नागरिक उड्डयन मंत्रालय का संयुक्त सचिव बताने का आरोप है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने पद का हवाला देकर दो कमरे बुक कराए और महाकाल मंदिर में सुबह होने वाली भस्म आरती के लिए VIP सुविधा देने का दबाव बनाया।

मंदिर अधिकारियों ने जब उससे अधिकारी होने का प्रमाण मांगा तो कथित तौर पर उसने कई तरह के दावे किए। उसने अपने परिवार के कुछ सदस्यों को भी IAS अधिकारी बताया और दर्शन के लिए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार का पत्र होने की बात कही।

मामले में पुलिस ने संबंधित मंत्रालय से जानकारी की तो कथित तौर पर पता चला कि इस नाम का कोई संयुक्त सचिव वहां नहीं है। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

रुतबा दिखाकर भरोसा जीतना, फिर ठगी का आरोप

मध्यप्रदेश में सामने आए इन मामलों से यह सवाल उठ रहा है कि फर्जी अधिकारी सरकारी पद और पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को कैसे प्रभावित कर रहे हैं। आरोपियों ने महंगी गाड़ियों, सरकारी पदों के नाम, फर्जी दस्तावेज और सोशल मीडिया प्रोफाइल का सहारा लेकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश की।

हालांकि, इन मामलों में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। पुलिस की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन कथित फर्जी अधिकारियों ने कितने लोगों को निशाना बनाया और इस नेटवर्क में उनके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे।

नितिन मिश्रा

नितिन मिश्रा फ्रीलांस जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 3 वर्षों का अनुभव है। रायपुर में 2023 से द सूत्र में रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान क्राइम, राजनीति, नगर निगम, आंदोलन और जनहित से जुड़ी खबरें की। द सूत्र के बाद सैटेलाइट चैनल TV 24 और ASIAN NEWS में काम किया। इस दौरान नितिन मिश्रा ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, कल्‍चरल, स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज, डिफेंस और ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की हैं। वर्तमान में नितिन पत्रकारिता एवं जनसंचार में Ph.D कर रहें हैं।

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