नई दिल्ली। यह खबर जंतर-मंतर पर पुलिसिया उत्पीड़न और भाजपा के समर्थकों द्वारा की गई हिंसा का एक नया अध्याय खोलती है। आपको याद हो कि जंतर मंतर पर विरोध विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी की दलित कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय पर स्वतंत्र भारद्वाज नाम के एक कट्टर हिन्दुवादी युवक ने हमला कर दिया था। संजय को सिर में गंभीर चोट आई, जिसमें सात टांके लगे।ग़ज़ब यह है कि जिस युवक ने हमला किया था उसे जेल नहीं भेजा गया।लेंस को जानकारी मिली है कि उस युवक का चिराग़ पासवान और कपिल मिश्रा से संबंध का दावा बिल्कुल सच है। उस युवक का रसूख ऐसा है कि उसे स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर वीआईपी अतिथि आमंत्रित भी किया गया।
जंतर मंतर पर हिंसा लेकिन पुलिस का संरक्षण

मूल रूप से दरभंगा बिहार का रहने वाला स्वतंत्र भारद्वाज अचानक एक पॉडकास्ट में नजर आया जिसमें उसने दावा किया कि इस हमले के बावजूद दिल्ली पुलिस और बीजेपी के संरक्षण की वजह से मैं बच निकला।एक पॉडकास्ट में, भारद्वाज ने राजनीतिक समर्थन का दावा करते हुए कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को अपने “बड़े भाई” बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इन नेताओं के राजनीतिक हस्तक्षेप ने उन्हें हिरासत में रखे जाने से बचने में मदद की।स्वतंत्र का यह भी दावा था कि हमला करने के बावजूद वो जंतर मंतर पर बिना किसी डर के घूमता रहा क्योंकि उसे पुलिस का संरक्षण प्राप्त था. ।
निशु आजाद ने माँगा न्याय
इस वीडियो के सामने आने के बाद निशु आजाद ने दिल्ली पुलिस और नरेंद्र मोदी से जवाब मांगा है और राहुल गांधी से मदद की गुहार लगाई है। निशु का आरोप है कि पिता पर हमले के दिन पुलिस ने हत्या के प्रयास सहित और भी गंभीर आरोप लगाने से इनकार कर दिया और यहां तक कि उन्हें “अदालत का आदेश लेने” के लिए भी कहा।स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि उसे पुलिस ने जूते और लाठी भी उपलब्ध कराई थी। गौरतलब है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बिना वर्दी के लाठीधारियों ने जमकर कहर बरपाया था और अब तक उनकी शिनाख्त भी नहीं हो पाई है।
बार बार जंतर मंतर की वारदात करने का कबूलनामा
सवाल खड़ा होता है कि अगर भारद्वाज का दावा झूठा है, तो सार्वजनिक रूप से इसका खंडन क्यों नहीं किया गया? पुलिस ने उस वक्त प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया और अब स्वतंत्र के दावों पर कोई जवाब क्यों नहीं दे रही है? द लेंस के पास वो तथ्य मौजूद है जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज ने एक बार नहीं कई बार जंतर मंतर पर हिंसा करने की बात कबूली ।
पुलिस ने प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया होता तो यक़ीन स्वतंत्र जेल में होता मगर ऐसा नहीं हुआ आइए जानते हैं स्वतंत्र भारद्वाज को और समझते हैं कि क्या यह आदतन अपराधी है।
लगातार कर रहा है पुलिस का इस्तेमाल कर अपराध

स्वतंत्र भारद्वाज के अगर इतिहास को देखें तो साफ़ पता चलता है कि वो दिल्ली पुलिस के नाम का इस्तेमाल अपनी नफ़रत और उन्माद को फैलाने के लिए कई बार कर चुका है। हाल के दिनों में कई बार उसे बाइक पर जाने वाले मुस्लिम दंपतियों को शूट करते और दिल्ली पुलिस को टैग कर मनमाने ढंग से उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के लिए उकसाते देखा जा सकता है।उसकी दीवार पर फ़िल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर को संबोधित बेहद अश्लील टिप्पणियां भी मौजूद हैं।यह साफ़ पता चलता है कि दिल्ली एनसीआर में सक्रिय दक्ष चौधरी, अभिषेक ठाकुर आदि के ग्रुप के साथ ही यह अक्सर दिखता है।
आर्थिक आरक्षण मोर्चा का आयोजक
जंतर मंतर पर आर्थिक आरक्षण मोर्चा की फ्लॉप रैली के आयोजन में इसने बढ़ चढ़कर भूमिका निभाई थी। जिसमे यह बीजेपी और नरेंद्र मोदी के विरोध की बात कर रहा है लेकिन योगी आदित्यनाथ को समर्थन दिए जाने को कह रहा है। यह दिमागी नक्सल का इलाज करने की बात करता रहा है और कख़्त है कि आप आने वाले समय में दिमाग़ी नक्सलियों का इलाज करते वीडियो देखेंगे। वंदेमातरम् विवाद के बीच यह बेल्ट और कट्टा चलाने की बात भी कह रहा है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा और लोकजनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ इसकी तस्वीरें मौजूद हैं।









