BJP-कांग्रेस अलग बस्तर राज्य के खिलाफ; जानिए क्यों उठी अलग राज्य की मांग?

Bastar

रायपुर। छत्तीसगढ़ से अलग बस्तर (Bastar) राज्य बनाने की मांग एक बार फिर चर्चा में है। सुकमा जिले से बस्तरिया राज मोर्चा ने अलग बस्तर राज्य की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। मोर्चा का दावा है कि बस्तर के पास अलग राज्य के लिए पर्याप्त भौगोलिक, जनसांख्यिकीय, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार मौजूद हैं।

हालांकि इस मांग ने छत्तीसगढ़ की सियासत में एक दिलचस्प स्थिति पैदा कर दी है। सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस, दोनों ही फिलहाल पृथक बस्तर राज्य की मांग के खिलाफ नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे विकास विरोधी सोच बताया है, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भी कहा है कि बस्तर को अलग राज्य या छठवीं अनुसूची की जरूरत नहीं है।

इस पर वीडियो रिपोर्ट देखिए

पृथक बस्तर राज्य की मांग पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसका विरोध किया है।

दिल्ली दौरे से लौटने के बाद रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनने के बाद बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर में सड़क, स्कूल और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के विकास में बाधा आती रही। अब सरकार का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ बस्तर में विकास कार्यों को भी गति मिली है।

सीएम साय ने पृथक बस्तर की मांग करने वालों को विकास विरोधी और छत्तीसगढ़ की जनता का विरोधी बताया।

वहीं विपक्षी कांग्रेस का रुख भी इस मुद्दे पर भाजपा से अलग नहीं है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि मनीष कुंजाम की पृथक बस्तर की मांग उनकी व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन यह कांग्रेस का मत नहीं है।

बैज के मुताबिक छत्तीसगढ़ कोई बहुत बड़ा राज्य नहीं है और राज्य के भीतर ही बस्तर के विकास की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना है कि बस्तर के पास जल, जंगल और जमीन जैसे महत्वपूर्ण संसाधन हैं और इन संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

हालांकि बैज ने भाजपा सरकार पर बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ के संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया, लेकिन उन्होंने पृथक बस्तर राज्य और छठवीं अनुसूची, दोनों की जरूरत से इनकार किया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक बस्तर के लिए पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करना ही पर्याप्त है।

BJP और कांग्रेस का रुख एक, लेकिन तर्क अलग

पृथक बस्तर के मुद्दे पर फिलहाल छत्तीसगढ़ की राजनीति में तस्वीर काफी स्पष्ट है। बस्तरिया राज मोर्चा अलग राज्य को बस्तर के अधिकार, विकास और संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण का रास्ता मान रहा है।

इस पर भाजपा का कहना है कि पृथक राज्य की मांग विकास विरोधी है और बस्तर का विकास छत्तीसगढ़ के भीतर ही संभव है।

दूसरी ओर कांग्रेस भी अलग बस्तर राज्य और छठवीं अनुसूची के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस का तर्क है कि बस्तर को अधिक अधिकार देने के लिए संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

क्यों उठ रही है पृथक बस्तर राज्य की मांग?

पृथक बस्तर राज्य की मांग उठा रहे बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक मनीष कुंजाम का तर्क है कि बस्तर का अपना विशिष्ट ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अस्तित्व है। उनका कहना है कि बस्तर का क्षेत्रफल देश के कई राज्यों से बड़ा है और इसकी आबादी भी कई छोटे राज्यों से अधिक है।

मोर्चा का कहना है कि जब इससे छोटे भौगोलिक क्षेत्र और कम आबादी वाले राज्य देश में अस्तित्व में हैं, तो बस्तर को अलग राज्य का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता।

मनीष कुंजाम का आरोप है कि आजादी के करीब आठ दशक बाद भी बस्तर को विकास और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का वह अधिकार नहीं मिल पाया, जिसका वह हकदार है। वह बस्तर में दशकों तक चले नक्सलवाद, सलवा जुडूम और इसके बाद बड़े औद्योगिक समूहों की मौजूदगी को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाते हैं।

मनीष कुंजाम का आरोप है कि बस्तर लंबे समय से बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप और संसाधनों के दोहन का केंद्र रहा है। उनके मुताबिक बस्तर के जल, जंगल और जमीन से होने वाले आर्थिक लाभ में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी बढ़नी चाहिए।

यह भी पढ़ें: बस्तर को अलग राज्य बनाने की मांग पर CM साय बोले- ऐसी बातें करने वाले विकास और छत्तीसगढ़ की जनता के विरोधी

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now