गढ़चिरौली। कभी घने जंगलों में नक्सली संगठन के सबसे प्रभावशाली कमांडरों में गिने जाने वाला मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ ‘सोनू दादा’ (Sonu Dada) अब मुख्यधारा में लौटने के बाद अपनी जिंदगी की नई शुरुआत कर रहे हैं। करीब तीन दशक तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती रहे भूपति अब गोंडवाना यूनिवर्सिटी, गढ़चिरौली में एक नई भूमिका में नजर आएंगे।
पूर्व माओवादी नेता भूपति को यूनिवर्सिटी की एक पहल के लिए कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई है। इस भूमिका में वह आदिवासी ग्रामीणों के अधिकारों से जुड़े मामलों और प्रशासनिक गतिविधियों में काम करेगा।
मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने 15 अक्टूबर 2025 को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया था। करीब चार दशक तक माओवादी संगठन में सक्रिय रहे भूपति को संगठन के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख रणनीतिकारों में गिना जाता था।
संगठन में उनका प्रभाव इतना था कि वह छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना के जंगलों में माओवादी गतिविधियों के संचालन से जुड़े रहे। वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के प्रवक्ता भी रहे।
रिपोर्टों के मुताबिक, भूपति पर 6 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की वांछित सूची में रहे और माओवादी संगठन की सबसे ताकतवर इकाई पोलित ब्यूरो का सदस्य भी थे
भूपति ने कभी भारतीय सेना में शामिल होने का सपना देखा था, लेकिन बाद में वह माओवादी आंदोलन से जुड़ गए और जंगलों में संगठन के लिए काम करने लगे। करीब चार दशक बाद हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के बाद अब वह शिक्षा और आदिवासी अधिकारों से जुड़े काम से जुड़ने जा रहे हैं।











