झूठ, अपराधियों के संरक्षण और बेगुनाहों पर हिंसा से दागदार हो रही दिल्ली पुलिस की वर्दी

नई दिल्ली। यह दिल्ली पुलिस के लिए बड़ा झटका है। जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ भारी बल प्रयोग करने, सिविल ड्रेस के लोगों के हाथों में डंडे थमाने और पैलेट गन का युवाओं छात्रों पर इस्तेमाल को लेकर शोर थमा नहीं था कि महिला मुस्लिम पत्रकारों की पिटाई और अपराधियों को संरक्षण देने को लेकर पुख्ता जानकारियां सामने आ गई हैं। इन सबके बीच इंडियन एक्सप्रेस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।एक्सप्रेस ने खुलासा किया है कि जंतर-मंतर पर छात्रों के पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) द्वारा जिन 2873 लोगों की आपराधिक रिकार्ड के आधार पर पहचान की गई उनमें से २५ जेल में बंद मिले यह संख्या ज़्यादा हो सकती है ग़ज़ब यह है कि दिल्ली पुलिस ने यह दावा सुप्रीम कोर्ट में भी कर दिया।महत्वपूर्ण है कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन काम करती है ऐसे में गृह मंत्रालय के काम काज के तौर तरीकों पर पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जेल में बंद मिले दिल्ली पुलिस द्वारा घोषित अपराधी

मंगलवार को जब सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़ी सभी एफआईआर रद्द कर दी थीं, तब सरकार को उन 2873 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी थी, जिनके बारे में दिल्ली पुलिस का दावा था कि उनका आपराधिक रिकॉर्ड है। पुलिस के अनुसार ये लोग 20 से 26 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर मौजूद थे और उनकी पहचान एफआरएस से हुई थी।हालांकि इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में पता चला कि इनमें से कम से कम 25 लोग उस समय जेल में बंद थे।सवाल खड़ा होता है कि इन नामों की दिल्ली पुलिस द्वारा तस्दीक क्यों नहीं की गई?दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कार्रवाई सिर्फ फेशियल रिकग्निशन के आधार पर नहीं की जाएगी। आगे की कार्रवाई “फील्ड वेरिफिकेशन” के बाद ही होगी।पुलिस ने 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था। इसमें कहा गया कि एफआरएस ने पुलिस डेटाबेस के मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान कर लोगों की पहचान की। 2,402 लोगों की पहचान दिल्ली पुलिस के बायोमीट्रिक डेटाबेस “क्राइम कुंडली” से और 471 की पहचान आपराधिक रिकॉर्ड से हुई।सोमवार को पुलिस ने कहा, “प्रदर्शनों के दौरान ऐसे 2,873 लोगों की पहचान की गई जिनका आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। हालांकि आगे की जांच अभी बाकी है।”

किसकी शह पर अपराध कर रहा स्वतंत्र भारद्वाज

एक बड़ा मामला स्वतंत्र भारद्वाज का है ख़ुद को कट्टर हिंदू कहने वाला यह युवक दावा कर रहा है की उसे दिल्ली पुलिस का संरक्षण प्राप्त था और उसने ही उसे जंतर मंतर पर छात्रों के ख़िलाफ़ प्रयोग करने को लाठियां उपलब्ध कराई थी। जंतर मंतर पर विरोध विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी की दलित कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय पर स्वतंत्र भारद्वाज ने हमला कर दिया था। संजय को सिर में गंभीर चोट आई, जिसमें सात टांके लगे।ग़ज़ब यह है कि जिस युवक ने हमला किया था उसे जेल नहीं भेजा गया।लेंस को जानकारी मिली है कि उस युवक का चिराग़ पासवान और कपिल मिश्रा से संबंध का दावा बिल्कुल सच है। उस युवक का रसूख ऐसा है कि उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह और स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर वीआईपी अतिथि आमंत्रित भी किया गया। सवाल खड़े हो रहे हैं की दिल्ली पुलिस ने अब तक उसे गिरफ़्तार क्यों नहीं किया है जबकि वह सार्वजनिक तौर पर विपक्षियों पर तमंचा दागने की बात कर रहा है।

शाह की मौजूदगी में पत्रकारों पर लाठी

दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में 3 सितंबर 2026 को एक कार्यक्रम की कवरेज के दौरान 4PM न्यूज नेटवर्क की दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नए विंग का उद्घाटन कर रहे थे।पत्रकारों का आरोप है कि वे मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोका, थाने ले गई और महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में पीटा। शाहीन खान का कहना है कि नाम “खान” सुनते ही पिटाई और तेज हो गई। उन्होंने चोट के निशान भी दिखाए हैं। 4PM ने वीडियो जारी कर पूछा कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछना क्या इतना बड़ा अपराध हो गया है।दिल्ली पुलिस ने अभी तक आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। साकेत थाने के एसएचओ दिनेश कुमार ने भी टिप्पणी से इनकार कर दिया।प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स समेत कई पत्रकार संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। मामला सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है।

पूर्व अतिरिक्त सचिव की गिरफ्तारी और रिहाई

पूर्व अतिरिक्त सचिव आशीष जोशी को 2 सितंबर 2026 को सुबह नेहरू पार्क में मॉर्निंग वॉक के दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के दो सादे कपड़ों वाले कर्मी अपने साथ ले गए। उन्हें न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट कार्यालय ले जाया गया, जहां 8 से 12 घंटे तक पूछताछ हुई। शाम करीब 7 बजे उन्हें घर छोड़ दिया गया। गिरफ्तारी नहीं हुई थी।पुलिस के अनुसार स्पेशल सेल में दो दिन पहले भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 (दंगा भड़काने की मंशा से उकसाहट) के तहत एफआईआर दर्ज थी, जो उनके चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित थी। हालांकि पूछताछ मुख्य रूप से उनके अगस्त के उस ट्वीट पर केंद्रित रही जिसमें उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और गृह सचिव के बीच जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर मतभेद का दावा किया था। वह पोस्ट भारत में बैन कर दी गई थी ।जोशी ने आरोप लगाया कि परिवार को समय पर सूचना नहीं दी गई, जो सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु दिशानिर्देशों और अनुच्छेद 22 का उल्लंघन है। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने इस मामले को उठाया था। जोशी सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना करते रहे हैं।

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