US Midterm Results :अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने बड़ा उलटफेर कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को हाउस और सीनेट दोनों सदनों में हार का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेट्स ने ऐसी जीत हासिल की है, जिसे आधुनिक अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में गिना जा रहा है। ट्रंप ने खुद स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी हार गई है।
अब सवाल यह है कि आने वाले दो साल में ट्रंप की स्थिति कितनी कमजोर होगी, भारत समेत दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा और ईरान युद्ध पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
मिडटर्म चुनाव क्या होता है?
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है। ठीक बीच में, यानी दो साल बाद होने वाले संसदीय चुनाव को मिडटर्म इलेक्शन कहते हैं। इसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों और सीनेट की एक-तिहाई सीटों पर चुनाव होता है। यह राष्ट्रपति के आधे कार्यकाल पर जनता का रिपोर्ट कार्ड माना जाता है।
अमेरिका में एक कहावत है – ‘मिडटर्म कर्स’। पिछले 20 में से 18 बार मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी मिडटर्म चुनाव हारती है। इस बार ट्रंप भी इससे बच नहीं पाए।
नतीजे क्या रहे?
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स
कुल 435 सीटें।
डेमोक्रेट्स – 253
रिपब्लिकन – 157
(कुछ सीटों के अंतिम नतीजे बाकी)
बहुमत के लिए 218 सीटें जरूरी होती हैं। डेमोक्रेट्स को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है।
सीनेट
कुल 100 सीटें। इस बार 35 सीटों पर चुनाव हुआ।
डेमोक्रेट्स ने कई महत्वपूर्ण सीटें छीन लीं। वर्तमान में डेमोक्रेट्स के पास बहुमत की स्थिति बन गई है।
गवर्नर चुनाव
अधिकांश राज्यों में भी डेमोक्रेट्स आगे रहे।
इस चुनाव के ऐतिहासिक रिकॉर्ड
मिशिगन से अब्दुल अल-सैयद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बने।
जॉर्जिया से कीशा लांस बॉटम्स पहली अश्वेत महिला गवर्नर बनीं।
न्यू हैम्पशायर से क्रिस पप्पास सीनेट पहुंचने वाले पहले समलैंगिक पुरुष बने।
न्यू मैक्सिको से डेब हालैंड पहली मूल अमेरिकी महिला गवर्नर बनीं।
ट्रंप क्यों हारे? पांच बड़ी वजहें
महंगाई – ज्यादातर वोटरों ने महंगाई को सबसे बड़ा मुद्दा बताया।
ईरान युद्ध – युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं और जनता नाराज हुई।
डेमोक्रेट्स की रणनीति – उन्होंने स्वास्थ्य सेवा और महंगाई जैसे मुद्दों पर फोकस रखा।
ट्रंप की घटती लोकप्रियता – रिपब्लिकन वोटरों में भी असंतोष बढ़ा।
हिस्पैनिक और अश्वेत वोटरों का रुख बदला – इन वर्गों में डेमोक्रेट्स को अच्छा समर्थन मिला।
अब क्या बदलेगा?
जनवरी से नई कांग्रेस काम करना शुरू करेगी। डेमोक्रेट्स के पास दोनों सदनों का नियंत्रण होने से:
जांच और समन की ताकत बढ़ेगी।
बजट पर नियंत्रण डेमोक्रेट्स के हाथ में होगा।
ट्रंप की कई नियुक्तियां अटक सकती हैं।
हालांकि ट्रंप एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर सकते हैं और विदेश नीति पर फैसला ले सकते हैं।
ट्रंप के सामने पांच बड़े खतरे
बजट युद्ध और सरकारी शटडाउन का खतरा।
जजों और मंत्रियों की नियुक्तियों में रुकावट।
कई मामलों में जांच शुरू होने की संभावना।
बड़े कानून पास कराना मुश्किल होगा।
महाभियोग की प्रक्रिया दोबारा शुरू होने की आशंका (हालांकि सीनेट में दो-तिहाई बहुमत मुश्किल है)।
पार्टी के अंदर बगावत के संकेत
हार के बाद ट्रंप की टीम में भी दरार दिखने लगी है। विदेश मंत्री मार्को रूबियो के इस्तीफे की अटकलें तेज हुईं, हालांकि उन्होंने इन्हें खारिज किया। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुलेआम ईरान युद्ध को हार की वजह बताया। ट्रंप प्रशासन से एक बड़े अधिकारी का इस्तीफा भी सामने आया है।
भारत और दुनिया पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के कमजोर पड़ने से भारत-अमेरिका रिश्तों में कुछ दबाव कम हो सकता है, लेकिन तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद कम है। ईरान युद्ध पर संसद दबाव बना सकती है, लेकिन अंतिम फैसला राष्ट्रपति के पास ही रहेगा।
कुल मिलाकर यह मिडटर्म चुनाव सिर्फ सत्ता का गणित नहीं, बल्कि ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता का बड़ा संदेश माना जा रहा है। अगले दो साल अमेरिका की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।











