त्योहारों में दुकानें बंद रहीं तो कैसे चलेगा कारोबार? व्यापारियों की सुप्रीम कोर्ट से गुहार,केंद्र को नोटिस

नई दिल्ली।दिल्ली के व्यापारियों की संस्था किराना कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में त्योहारी सीजन के दौरान सेंट्रल दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और रैलियों पर रोक लगाने की मांग की गई है। व्यापारियों का कहना है कि धरना-प्रदर्शन और रैलियों के कारण उनके कारोबार और अधिकारों पर असर पड़ रहा है।

व्यापारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विरोध प्रदर्शनों और रैलियों के कारण करीब 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि आज कनॉट प्लेस की दुकानें बंद हैं और पूरा बाजार खाली पड़ा है। त्योहारों के मौसम में कारोबार प्रभावित होने से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

विरोध प्रदर्शन के लिए कोई दूसरा रास्ता निकालने की जरूरत

मुकुल रोहतगी ने कहा कि दिल्ली पिछले 80 सालों में काफी बदल चुकी है। जंतर-मंतर और रामलीला मैदान जैसे इलाकों के आसपास अब बड़ी आबादी रहती है। वहां अस्पताल भी हैं और करीब 50 लाख लोग उस इलाके में रहते हैं। ऐसे में विरोध प्रदर्शन के लिए कोई दूसरा रास्ता निकालने की जरूरत है ताकि आम लोगों और कारोबारियों को परेशानी न हो।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो भी संगठन बंद का आह्वान करता है, उसे इसकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। वहीं वकील हरिहरन ने कहा कि प्रदर्शन के लिए तय जगह पहले से अधिसूचित है फिर भी उस पर आपत्ति जताई जा रही है।

CJI सूर्यकांत ने दिया मामले में पक्षकार बनाने का सुझाव

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जिन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है, उन्हें भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाए। उनका पक्ष सुने बिना अदालत कोई फैसला नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन की अनुमति देने या न देने वाले आदेश में इसका स्पष्ट कारण बताया जाना चाहिए। कोई भी संगठन यह कहकर दूसरों को नहीं रोक सकता कि वह खुद विरोध प्रदर्शन कर रहा है।

तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CJP को प्रदर्शन की अनुमति सिर्फ एक दिन के लिए दी गई थी। लेकिन संगठन ने 17 दिनों तक उस जगह पर कब्जा बनाए रखा। प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च भी करने लगे थे। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के किसी को संसद या सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

अंत में व्यापारियों की ओर से मुकुल रोहतगी ने मांग की कि अगले दो महीने तक कोई विरोध प्रदर्शन या धरना न होने दिया जाए क्योंकि इससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कोई भी व्यक्ति विरोध-प्रदर्शन करने के लिए किसी जगह पर अनिश्चित काल तक कब्जा नहीं कर सकता और यहां तक कि ऐसी गतिविधियों के लिए तय की गई जगहों के लिए भी एक निश्चित समय-सीमा होनी चाहिए।
!

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now