जापान | जापान (Japan) अपनी नई लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण और सैन्य अभ्यास के लिए भारत की मदद लेना चाहता है। जापान की ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स (GSDF) के प्रमुख जनरल मासायोशी अराई ने 27 अक्टूबर को इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जापानी रक्षा अधिकारियों का एक दल अक्टूबर के मध्य में भारत आया था। इस दल ने करीब एक सप्ताह तक यहां मिसाइल परीक्षण केंद्रों और सैन्य अभ्यास की सुविधाओं का जायजा लिया। जापान की योजना अपनी करीब 1000 किलोमीटर तक मार करने वाली टाइप-25 एंटी-शिप मिसाइलों और छोटे हमलावर ड्रोन का भारत में परीक्षण करने की संभावनाएं तलाशने की है।
जापान में क्यों नहीं हो पा रहा लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण?
जापान के सामने सबसे बड़ी समस्या उसके सीमित भूभाग और घनी आबादी की है। लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण करने के लिए बड़े और सुरक्षित क्षेत्र की जरूरत होती है। इसके अलावा हवाई क्षेत्र और समुद्री रास्तों पर भी सुरक्षा के लिहाज से पाबंदियां लगानी पड़ती हैं। जापान में इस तरह की सुविधाएं सीमित हैं, जिसके कारण नई मिसाइलों की पूरी क्षमता के साथ अभ्यास करना मुश्किल हो रहा है।
जनरल अराई ने भी माना है कि लंबी दूरी की मिसाइलों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए सैन्य अभ्यास करना जापान के लिए बड़ी चुनौती है। इसी वजह से जापान अपने देश के भीतर सुविधाएं बढ़ाने के साथ विदेशों में भी परीक्षण केंद्रों के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है।
1000 किलोमीटर तक मार कर सकती है टाइप-25 मिसाइल
जापान जिस टाइप-25 मिसाइल के परीक्षण की तैयारी कर रहा है, वह समुद्र में मौजूद दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए विकसित की गई है। यह जापान की पुरानी टाइप-12 मिसाइल का उन्नत संस्करण है। इसकी मारक क्षमता करीब 1000 किलोमीटर बताई जा रही है। इतनी लंबी दूरी तक मिसाइल दागने के लिए जापान को ऐसे परीक्षण क्षेत्र की जरूरत है, जहां आबादी और समुद्री यातायात को खतरे में डाले बिना अभ्यास किया जा सके।
मिसाइलों के अलावा जापान छोटे हमलावर ड्रोन के परीक्षण की संभावनाएं भी तलाश रहा है। जापानी अधिकारियों ने भारत दौरे के दौरान इन ड्रोन के इस्तेमाल और अभ्यास से जुड़ी सुविधाओं पर भी चर्चा की है।
भारत के मिसाइल परीक्षण केंद्रों पर जापान की नजर
भारत के पास लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण के लिए पहले से विकसित सुविधाएं मौजूद हैं। ओडिशा के चांदीपुर में स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज और बंगाल की खाड़ी से जुड़े परीक्षण क्षेत्र इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। भारत अपनी विभिन्न मिसाइल प्रणालियों का परीक्षण इन सुविधाओं के जरिए करता रहा है।
जापान के लिए भारत की इन सुविधाओं का इस्तेमाल करना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जापान को किस परीक्षण केंद्र के इस्तेमाल की अनुमति मिलेगी। दोनों देशों ने किसी स्थान या परीक्षण कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अहम है यह पहल
जापान की इस पहल को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर भारत और जापान दोनों की चिंताएं रही हैं। दोनों देश पिछले कुछ वर्षों से रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
भारत और जापान क्वाड समूह के भी सदस्य हैं, जिसमें अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। जापान इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस जैसे देशों में भी मिसाइल संबंधी सैन्य अभ्यास कर चुका है। वहीं, भारत भी सिंगापुर जैसे मित्र देशों को सैन्य प्रशिक्षण के लिए अपनी सुविधाएं उपलब्ध कराता रहा है।
फिलहाल जापान और भारत के बीच बातचीत शुरुआती दौर में है। जापानी अधिकारियों के दौरे के बावजूद मिसाइल परीक्षण की तारीख, स्थान और औपचारिक समझौते को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है। अगर दोनों देश इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो इससे भारत-जापान रक्षा सहयोग को और मजबूती मिल सकती है।











