अमेरिका में फिर गूंजा ‘नो किंग्स’ का नारा, ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन के साथ मतदान की अपील

वॉशिंगटन। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। शनिवार, 17 अक्टूबर को ‘नो किंग्स’ (No Kings) आंदोलन के तहत देश के सभी 50 राज्यों और राजधानी वॉशिंगटन डीसी में 2,500 से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें लाखों लोगों की भागीदारी की खबरें सामने आई हैं, जबकि आयोजकों ने देशभर में लाखों से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया है। इस बार आंदोलन का मुख्य जोर सड़कों पर विरोध जताने के साथ लोगों को मतदान के लिए जागरूक करने पर रहा। तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले प्रदर्शनकारियों ने मतदाताओं से समय से पहले वोट डालने और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी में भाग लेने की अपील की।

विरोध प्रदर्शन से मतदान अभियान की ओर बढ़ा आंदोलन

‘नो किंग्स: वोट अर्ली’ नाम से आयोजित इस अभियान में न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस, शिकागो, सिएटल, मिनियापोलिस और वॉशिंगटन समेत कई शहरों में रैलियां निकाली गईं। कई जगह मतदान संबंधी जानकारी देने के लिए केंद्र लगाए गए, जबकि कुछ स्थानों पर संगीत कार्यक्रम और सामुदायिक सभाएं आयोजित हुईं। प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट अर्ली’, ‘योर वोट इज योर वॉइस’ और ‘हैंड्स ऑफ माय बैलट’ जैसे नारों के जरिए लोगों से मतदान में भाग लेने की अपील की। आयोजकों ने इसे चुनाव से पहले मतदाताओं को सक्रिय करने और निष्पक्ष चुनाव की मांग को मजबूत करने वाला अभियान बताया।

ट्रंप की नीतियों और आव्रजन कार्रवाई का विरोध

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति, आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी (ICE) की कार्रवाई और राष्ट्रपति की शक्तियों के विस्तार पर आपत्ति जताई। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, आर्थिक परेशानियों और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार की नीतियों से लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, व्हाइट हाउस पहले भी आंदोलन के इन आरोपों को खारिज कर चुका है। आयोजकों ने अपने अभियान को नागरिक भागीदारी और मतदान के अधिकार से जुड़ा बताया है।

कई शहरों में हजारों लोग जुटे, कुल संख्या पर स्थिति साफ नहीं

People take part in a “No Kings” protest as part of a nationwide day of action aimed at encouraging early voting ahead of the midterm elections in Atlanta, Georgia, US, October 17, 2026. REUTERS/Megan Varner

सिएटल, मिनियापोलिस और लॉस एंजिलिस जैसे शहरों में हजारों लोगों ने कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वॉशिंगटन के लिंकन मेमोरियल के पास भी प्रदर्शनकारी जुटे। आयोजकों और कुछ मीडिया रिपोर्टों में देशभर में लाखों से लेकर कई मिलियन लोगों की भागीदारी बताई गई है। हालांकि, 17 अक्टूबर के कार्यक्रमों में शामिल लोगों की कुल संख्या का स्वतंत्र और व्यापक आकलन सामने नहीं आया है। इससे पहले मार्च 2026 में हुए प्रदर्शन में आयोजकों ने 80 से 90 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया था। अक्टूबर के कार्यक्रमों को लेकर भी कुछ जगह इसी तरह के आंकड़े सामने आए हैं, लेकिन उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रदर्शन के दौरान इंस्टाग्राम अकाउंट बंद, मेटा ने मांगी माफी

आंदोलन के दौरान ‘नो किंग्स’ गठबंधन का इंस्टाग्राम अकाउंट कई घंटों के लिए बंद हो गया था। इस पर आयोजकों ने आपत्ति जताते हुए चुनाव के समय सूचना साझा करने में बाधा पैदा होने का आरोप लगाया। बाद में इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने माफी मांगते हुए इसे स्वचालित प्रणाली की गलती बताया। आयोजकों ने मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है।

2025 में शुरू हुआ था ‘नो किंग्स’ आंदोलन

अमेरिका में ‘नो किंग्स’ आंदोलन की शुरुआत जून 2025 में हुई थी। इसके बाद अक्टूबर 2025 और मार्च 2026 में भी बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए गए। आंदोलन का नाम किसी एक व्यक्ति के हाथ में राजाओं जैसी शक्तियां केंद्रित होने के विरोध को दर्शाता है। इस बार आयोजकों ने चुनाव से पहले मतदान की भागीदारी बढ़ाने और चुनावी प्रक्रिया की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया है। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होगा।

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