फिर जल रहा है फ्रांस, 8 लाख लोग सड़कों पर, हिंसा में 1200 गिरफ्तार

पेरिस। फ्रांस में सितंबर से चल रहे विरोध प्रदर्शन शनिवार को हिंसक रूप ले चुके हैं। देशभर में लाखों लोग सड़कों पर उतरे। कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। ऐतिहासिक इमारतों तक में आग लगा दी गई। सरकार के अनुसार करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। इनमें अकेले पेरिस में एक लाख से ज्यादा लोग थे। वहीं ट्रेड यूनियन CGT का दावा है कि आठ लाख से अधिक लोग सड़कों पर आए।

क्यों शुरू हुआ यह आंदोलन?

यह विरोध सितंबर में स्कूलों की खराब हालत से शुरू हुआ था। पेरिस के क्रेतेइल इलाके के एक हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैल गया। छात्रों का कहना है कि स्कूलों में संसाधनों की भारी कमी है। छतें टूटी हुई हैं, पानी टपकता है, फर्नीचर टूटा पड़ा है और चूहे घूमते रहते हैं। गर्मी में बिना एसी वाले कमरों में पढ़ाई करनी पड़ती है और सर्दी में ठंड से परेशानी होती है। कई स्कूलों को तोड़फोड़ के कारण बंद भी करना पड़ा। बाद में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें, वेतन और पेंशन बढ़ाने की मांग भी जुड़ गई। ट्रेड यूनियनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन कर दिया।

शनिवार को क्या-क्या हुआ?

शनिवार को पेरिस, मार्सिले, नीस, नैनटेस, बोर्डो, लिमोज, लिले, टूलूज, स्ट्रासबर्ग और ल्योन समेत कई शहरों में बड़े प्रदर्शन हुए। कई जगह दुकानों के शटर तोड़कर लूटपाट की गई। सुपरमार्केट, फार्मेसी, कपड़ों की दुकानें, इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर और यहां तक कि ऐपल स्टोर से भी सामान लूटा गया। खड़ी कारों में आग लगाई गई। लिमोज में 1876 में बनी टाउन हॉल की इमारत में आग लगा दी गई। यह इमारत विश्व युद्ध के दौरान भी सुरक्षित रही थी। मार्सिले में प्रदर्शनकारी टाउन हॉल में घुस गए। ल्योन में टूरिस्ट ऑफिस में आग लगाई गई। बोर्डो में पुलिस परिसर में तोड़फोड़ हुई। पुलिस पर पत्थर और डंडों से हमले हुए। पुलिस यूनियन ने कहा कि उनके जवानों को जगह-जगह निशाना बनाया जा रहा है।

पुलिस और सरकार का रुख

प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने बताया कि हिंसा में शामिल 1200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 150 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि तोड़फोड़, लूटपाट और सरकारी इमारतों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उन्हें सजा दी जाएगी। पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।

मौजूदा स्थिति

कई शहरों में सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पेरिस के मेयर के अनुसार कुछ इलाके पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। विपक्षी दल भी इस हिंसा को मुद्दा बना रहे हैं। फ्रांस में स्कूलों की समस्या, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट को लेकर नाराजगी कई हफ्तों से बनी हुई है। शनिवार की घटनाओं ने इसे और गंभीर बना दिया है।

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