रायपुर। चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों की मौजूदा मांगों के बीच वर्ष 2009 का नवीन चावला (Navin Chawla) प्रकरण फिर चर्चा में है। भाजपा नेता अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालास्वामी की सिफारिश के बावजूद चुनाव आयुक्त नवीन चावला (Navin Chawla)को पद से हटाने से इनकार कर दिया था। उन्होंने इसे कांग्रेस के मौजूदा रुख और उसके पूर्ववर्ती फैसले के बीच विरोधाभास बताते हुए दोहरे मानदंड का मामला कहा है।
वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालास्वामी ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला के कथित पक्षपातपूर्ण आचरण का हवाला देते हुए उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की थी। यह मामला उस समय राजनीतिक विवाद का विषय बना था।
एक मार्च 2009 को तत्कालीन यूपीए सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने गोपालास्वामी की सिफारिश खारिज कर दी थी। इसके बाद 20 अप्रैल 2009 को नवीन चावला ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला। उन्होंने 2010 तक इस पद पर काम किया। इस घटनाक्रम की उस समय व्यापक राजनीतिक चर्चा हुई थी।
गोपालास्वामी की सिफारिश में चावला के कामकाज को पक्षपातपूर्ण बताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से संबंधित आपत्तियां दर्ज की गई थीं।
नरेश गुप्ता ने कहा कि आज कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस को वर्ष 2009 के अपने शासनकाल के फैसले पर भी जवाब देना चाहिए।









