अदालत ने कहा कि विरोध करने वालों के लिए बेहतर सुविधाओं वाले किसी वैकल्पिक स्थान को नामित करने की जरूरत है या नहीं, इस पर निर्णय लिया जाए।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से विचार करने को कहा है कि क्या शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर (Jantar Mantar)के स्थान पर कोई अन्य स्थान नामित किया जाए। यह सुझाव दिया गया था कि विरोध करने वालों के लिए पर्याप्त सुविधाओं से युक्त कोई वैकल्पिक स्थल चिह्नित करने की जरूरत है।
अदालत ने यह निर्देश तब दिया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सक्षम प्राधिकारी शांतिपूर्ण विरोध के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी अन्य स्थान को नामित करने पर विचार करेगा, और इस बयान को आदेश में दर्ज करने का अनुरोध किया। एसजी ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल भी इस सुझाव से सहमत थे।
अदालत ने आदेश में कहा: “सुनवाई के दौरान यह भी सुझाव दिया गया, और पक्षकारों के विद्वान वरिष्ठ अधिवक्त हैं कि अब समय आ गया है कि कोई उपयुक्त स्थान चिह्नित और नामित किया जाए जहां शांतिपूर्ण और वैध विरोध करने वालों के लिए सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। सक्षम प्राधिकारी इस सुझाव पर विचार करे और उचित निर्णय ले।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सीजेपी और विपक्षी दलों द्वारा कल घोषित विरोध के मद्देनजर दिल्ली आने वाली ट्रेनों और राष्ट्रीय राजधानी में मेट्रो सेवाओं के निलंबन को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि पुलिस ने सीजेपी और भारतीय युवा कांग्रेस को जंतर-मंतर पर विरोध करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जो नामित विरोध स्थल है।सीपीआई(एम) महासचिव एम.ए. बेबी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि वैकल्पिक स्थल रामलीला मैदान पर भी विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर स्वयं एक नामित विरोध स्थल है।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि यदि जंतर-मंतर पर विरोध की अनुमति नहीं दी जा रही है, तो अधिकारी विरोध करने वालों को रामलीला मैदान का उपयोग करने की अनुमति दे सकते थे।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जंतर-मंतर क्षेत्र में सरकारी आवास हैं और कुछ सांसद आस-पास की गली में रहते हैं। उन्होंने स्थल पर विरोध करने वालों को होने वाली कठिनाइयों, जिसमें शौचालयों तक पहुंच न होना शामिल है, पर भी प्रकाश डाला।सीजेआई ने टिप्पणी की: “वहां सरकारी आवास हैं। कुछ सांसद सामने की गली में रहते हैं। विरोध करने वालों को भी कई समस्याएं हैं। उन्हें वहां शौचालय नहीं दिए जाते।”इन दलीलों के जवाब में सॉलिसिटर जनरल मेहता ने जंतर-मंतर पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता देने की कठिनाइयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि कोई विरोध करने वाला बीमार पड़ जाए तो एम्बुलेंस को उस स्थान तक पहुंचने में कठिनाई होगी।
पीठ ने मुख्य रूप से परिवहन सेवाओं के निलंबन के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया और एक आदेश पारित किया, जिसमें केंद्र से ट्रेन और मेट्रो सेवाओं को पूरी तरह बंद न करने और उन्हें नियंत्रित तरीके से चलाने की अनुमति देने को कहा गया।
आदेश लिखे जाने के बाद सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र विरोध स्थल को फिर से नामित करने पर निर्णय लेगा।
दलीलों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध के लिए वैकल्पिक स्थल चिह्नित करने के सुझाव पर विचार करने और उचित निर्णय लेने का मामला सक्षम प्राधिकारी पर छोड़ दिया।
इससे पहले अदालत ने जंतर-मंतर पर विरोध की अनुमति देने के खिलाफ एक अन्य याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था और कहा था कि याचिका एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाती है।








