कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) की दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है। नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार हासी रानी रथ ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को 1.22 लाख से ज्यादा वोटों से हराया है। वहीं, रेजीनगर सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार शंखरव सरकार ने 75 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। कुछ महीने पहले ही पश्चिम बंगाल में 15 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस की सरकार को हराकर सत्ता में आई भाजपा के लिए इन दोनों सीटों के नतीजे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
नंदीग्राम में भाजपा ने तोड़ा जीत का पुराना रिकॉर्ड
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार हासी रानी रथ को 1,64,227 वोट मिले, जबकि उनके सबसे नजदीकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के मिलन प्रधान को 41,674 वोट मिले। इस तरह भाजपा ने 1,22,553 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
नंदीग्राम में 1967 के बाद यह जीत का सबसे बड़ा अंतर बताया जा रहा है। इससे पहले यह रिकॉर्ड शुभेंदु अधिकारी के नाम था। उन्होंने 2016 में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर इस सीट से 81,230 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।
हासी रानी रथ, शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ की 6 मई को उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने से हुआ उपचुनाव
नंदीग्राम में उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी थी।
इस उपचुनाव में विपक्ष की स्थिति भी चर्चा में रही। ममता बनर्जी की पार्टी ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने शुरुआत में संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने आखिरी समय में अपना नामांकन वापस ले लिया।
बताया गया कि संचिता ने यह फैसला शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के एक दिन बाद लिया था। इसके बाद ममता बनर्जी की पार्टी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया। मिलन प्रधान को बाद में एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था, हालांकि उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई थी।
वहीं, डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार एहतेशमुल हक को सिर्फ 843 वोट मिले और वे पांचवें स्थान पर रहे।
रेजीनगर में भी भाजपा की जीत, 75 हजार से ज्यादा वोटों का अंतर
मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है। पार्टी उम्मीदवार शंखरव सरकार को 1,29,914 वोट मिले, जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी के उम्मीदवार गोलाम नबी आजाद को 54,098 वोट मिले। भाजपा ने यह सीट 75,816 वोटों के अंतर से जीती।
रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर के इस्तीफे के कारण खाली हुई थी। कबीर ने विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नौदा, दोनों सीटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ दी थी।
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद बनाने की अपनी योजना को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। उपचुनाव में उनकी पार्टी ने उनके बेटे गोलाम नबी आजाद को मैदान में उतारा था।
इस सीट पर कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। इसके बाद ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस, सीपीआईएम और डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रहे।
अल्पसंख्यक वोटों को लेकर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा दावा
दोनों सीटों पर जीत के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं ने भी भाजपा का समर्थन किया है।
रेजीनगर में करीब 70 प्रतिशत और नंदीग्राम में लगभग 27 प्रतिशत मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से बताए जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम में हासी रानी रथ ने उनकी जीत का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।
उन्होंने रेजीनगर के मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि भाजपा को वहां अल्पसंख्यक समुदाय से भी बड़ी संख्या में वोट मिले हैं। साथ ही उन्होंने अन्नपूर्णा योजना का जिक्र किया, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये दिए जाते हैं।
हालांकि, केवल चुनाव नतीजों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किस समुदाय के कितने मतदाताओं ने किस पार्टी को वोट दिया।
बंगाल में सत्ता बदलने के बाद पहला बड़ा चुनावी इम्तिहान
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर पहली बार अपनी सरकार बनाई थी। इसके बाद नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव को नई सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनावी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था।
दूसरी तरफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में टूट के बाद अलग-अलग गुट चुनाव मैदान में थे। ममता बनर्जी की पार्टी और ऋतब्रत बनर्जी की डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे थे।
इन नतीजों से दोनों सीटों पर भाजपा की मजबूत चुनावी स्थिति सामने आई है। वहीं, विपक्षी दलों के बीच बंटवारे और उम्मीदवारों के प्रदर्शन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।








