नई दिल्ली। दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन का ऐलान किया है। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद केंद्र सरकार से कहा है कि मेट्रो (Metro)स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक में जनता को असुविधा न होने पर विचार करने की जरूरत है।
एमए बेबी की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि बंद किए जाने वाले स्टेशनों में सुप्रीम कोर्ट, हौज खास, लाजपत नगर, कश्मीरी गेट, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, शाहदरा और रोहिणी समेत कई इलाके शामिल हैं। याचिका में दावा किया गया है कि इनमें से कई स्टेशन अस्पतालों, कॉलेजों, अदालतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने के लिए जरूरी हैं। याचिका में 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने के फैसले पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का भी जिक्र है।
याचिका के अनुसार, इस फैसले से इलाज कराने आ रहे मरीजों, छात्रों, यात्रियों और दूसरे लोगों को परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि दिल्ली आने वाले कुछ लोगों को दूसरे राज्यों में रोका गया और हिरासत में लिया गया। याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे लोगों को केवल इसी वजह से रोकना सही नहीं है।
प्रदर्शन की इजाजत देने की मांग
याचिका में कहा गया कि जंतर-मंतर प्रदर्शन के लिए तय जगह है और वहां शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार लोगों को मिलना चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस जरूरी कदम उठा सकती है, लेकिन इसके नाम पर पूरे शहर की मेट्रो सेवाओं को बंद करना और लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द करना सही नहीं है। एमए बेबी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले को रोका जाए और मेट्रो सेवाएं सामान्य की जाएं। साथ ही, रद्द की गई ट्रेनों को जहां तक संभव हो दोबारा चलाने, प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड और दूसरे सफर की व्यवस्था देने की मांग भी की गई ।
याचिका में कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दी जाए और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे लोगों को केवल इस वजह से न रोका जाए। याचिका के साथ तुरंत अंतरिम राहत देने की अर्जी भी दाखिल की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मेट्रो स्टेशन और रेलवे पर पूरी रोक पर दोबारा विचार की जरूरत है। सॉलिसिटर जनरल ने आश्वस्त किया है कि वह इस पर अधिकारियों से बात करेंगे ताकि लोगों को असुविधा न हो। ऐसे कदम उठाए जाएंगे जो प्रदर्शन की स्थिति के मुताबिक संतुलित होंगे। ट्रैफिक का प्रवाह भी सुनिश्चित किया जाएगा। लोगों के लिए एडवाइजरी भी जारी की जाएगी ताकि उन्हें असुविधा न हो।








