नई दिल्ली | दिल्ली (Delhi) पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के लिए विशेष योजना तैयार की है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी किसी भी तरह की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। साथ ही, प्रदर्शनकारियों को उनके अपने जिलों में ही रोकने की योजना बनाई गई है।
दिल्ली के सभी 15 जिलों में हिरासत केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा, नई दिल्ली जिले में 37 ऐसे स्थान तय किए गए हैं, जहां प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की जाएगी। हर स्थान की जिम्मेदारी किसी खास जिले या पुलिस इकाई को सौंपी गई है।
प्रदर्शन में कई संगठनों के शामिल होने की उम्मीद है। इसे देखते हुए नई दिल्ली जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तैनाती का मकसद प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखना और कानून-व्यवस्था कायम रखना है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आरोप लगाया है कि देशभर से उसके 10 हज़ार सपोर्टर्स को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया है कि ये लोग कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक, अलग-अलग छात्र संगठनों, किसान, दलित संगठनों और राजनीतिक दलों से ताल्लुक रखते हैं.उन्होंने लिखा, यह इमरजेंसी है।
इसके साथ ही आशुतोष रांका की पोस्ट को शेयर करते हुए सीजेपी के सह-संस्थापक सौरव दास ने एक्स पर लिखा, “भारत में इमरजेंसी लगा दी गई है।”दरअसल 10 अक्तूबर को सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। नेहा बोरा ने कहा है कि कल जहां पुलिस रोके वहीं प्रदर्शन करें।
पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने गुरुवार को पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदर्शन के लिए सुरक्षा रणनीति को अंतिम रूप दिया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “सबसे पहले यह फैसला लिया गया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के धरने या प्रदर्शन के लिए किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी। सभी जिलों के प्रमुखों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने जिलों में विशेष हिरासत केंद्र बनाएं और प्रदर्शनकारियों को उन्हीं जिलों में रोकें।”
इन निर्देशों के बाद पुलिस ने राजधानी के होटलों और गेस्टहाउसों की जांच की है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि प्रदर्शन में शामिल होने के इरादे से आने वाले नए लोगों को ठहरने की अनुमति न दें। अधिकारी के मुताबिक, होटल और गेस्टहाउस संचालकों से यह भी कहा गया है कि अगर उन्हें कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देता है, तो वे स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दें।
यह रणनीति पिछली बार की व्यवस्था से अलग है। इस बार सभी जिलों को गश्त बढ़ाने और अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे लोगों को रोकने के लिए कहा गया है। अगर कोई व्यक्ति लौटने से इनकार करता है, तो उसे तुरंत हिरासत केंद्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस ने राजधानी के सभी जिलों में तैनाती के आदेश दिए हैं। सभी जिलों, इकाइयों और बटालियनों को सुबह 11 बजे निर्धारित स्थानों पर पहुंचने और वहां से सुरक्षा ड्यूटी के लिए रवाना होने से पहले ब्रीफिंग लेने को कहा गया है।
एक सूत्र के मुताबिक, प्रदर्शनकारी संगठनों के वरिष्ठ नेताओं को भी रोकने का फैसला किया गया है। इसके लिए महिला पुलिसकर्मियों को आगे और पुरुष पुलिसकर्मियों को पीछे तैनात करने की योजना है।
सूत्र ने कहा, “हमें कई तरह की सूचनाएं मिली हैं कि इस बार प्रदर्शनकारी अपनी महिला प्रदर्शनकारियों को आगे रखकर पुलिसकर्मियों को बदनाम करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके जवाब में पुलिस ने भी महिला पुलिसकर्मियों को तैनात करने का फैसला किया है। उनके पास शरीर पर लगाए जाने वाले छोटे कैमरे होंगे।”
इस बीच दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर 47 बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं।
उन्होंने दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र लिखकर ध्यान दिलाया है कि पुलिस कॉलेजों, मस्जिदों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए) और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जाकर लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने की कोशिश कर रही है।
पत्र पर योगेंद्र यादव, शिक्षाविद् अपूर्वानंद, इतिहासकार मृदुला मुखर्जी, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक, राजनीतिक वैज्ञानिक नंदिनी सुंदर और सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज समेत 47 लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।








