नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक आक्रामक भाषण देते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने एक दिन पहले उसी मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी का तीखा जवाब दिया, जिसमें ट्रंप ने ईरान को नष्ट करने की बात कही थी। साथ ही उन्होंने करीब सात महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीति का दरवाजा भी खुला रखा।
पेजेश्कियान ने बुधवार को कहा, ‘अमेरिकी राष्ट्रपति ने हमें आतंकवादी कहा, लेकिन हम आतंकवादियों के शिकार हैं।’
अपने भाषण के दौरान पेजेश्कियान ने पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर दिखाई, जिनकी हत्या फरवरी में युद्ध की शुरुआत में संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हमले में हुई थी। उन्होंने मिनाब शहर में कथित अमेरिकी हवाई हमले में मारी गई स्कूली छात्राओं की तस्वीरें भी दिखाईं। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने हम पर हमला किया, लेकिन हमने सिर नहीं झुकाया और घुटने नहीं टेके।’
ईरानी राष्ट्रपति के भाषण शुरू होते ही अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का एक अधिकारी विशाल हॉल से बाहर चला गया। इजरायली प्रतिनिधिमंडल ने भी भाषण का बहिष्कार किया।
पेजेश्कियान ने कहा, ‘ट्रंप को पता होना चाहिए कि प्रतिबंधों और बढ़ते दबाव तथा धौंस के सामने ईरानी जनता का प्रतिरोध और बढ़ेगा।’ लेकिन ईरानी सत्ता व्यवस्था में अपेक्षाकृत नरमपंथी माने जाने वाले पेजेश्कियान ने बातचीत का रास्ता भी खुला रखा। उन्होंने कहा, ‘ईरान दुनिया की ओर अपना हाथ बढ़ाता है।’
उन्होंने कहा, ‘हम दुनिया को आमंत्रित करते हैं और पुकारते हैं—कमजोरी से नहीं, बल्कि अपनी शक्ति और दृढ़ता में गहरी आस्था के कारण सहयोग और साझेदारी के लिए। यह इस गहरी समझ से है कि इस क्षेत्र में अकेले किसी को सुरक्षा नहीं मिलेगी।’
बहुत अच्छी बैठक
मंगलवार को ट्रंप ने कहा था कि उनके दामाद जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ, जो तेहरान के साथ वार्ता चला रहे हैं, ने ईरानी अधिकारियों के साथ तीन घंटे की बैठक की।
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में पत्रकारों से कहा, ‘उनकी बहुत अच्छी बैठक हुई, बहुत उत्पादक बैठक हुई।’ उन्होंने कहा कि समझौते की दिशा में ‘काफी गति’ है। बाद में ट्रंप ने कहा कि बातचीत जारी है और उनका मानना है कि अंततः समझौता हो जाएगा।ये टिप्पणियां तब आईं जब ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधियों के सामने अपने भाषण में फिर से ईरान के विनाश की धमकी दी थी।
ट्रंप ने कहा, ‘क्या ईरान के साथ ऐसा समझौता होगा जिससे वे पुनर्निर्माण कर सकें और पहले से कहीं बड़ा देश बना सकें? या मैं इस्लामी गणराज्य को नष्ट कर दूं और जल्दी कर दूं, ताकि उन्हें दोबारा लोगों और देशों को मारने और तबाह करने का मौका न मिले?’
होर्मुज जलडमरूमध्य
ईरान की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार रोकने के ईरान के अभियान का जिक्र करते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान अमेरिका के उस प्रयास का विरोध करेगा, जिसमें वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग का इस्तेमाल देश पर युद्ध बढ़ाने के लिए कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य में हम यह नहीं मान सकते कि कुछ लोग उस जलमार्ग से स्वतंत्र पहुंच और लाभ लें, और उसी जलमार्ग का इस्तेमाल हम पर हमले करने तथा हमें असुरक्षा थोपने और हमारे अपने जलमार्गों तक पहुंच रोकने के लिए करें।’
अमेरिका स्थित सेंटर फॉर इंटरनेशनल पॉलिसी की सीनियर फेलो नेगार मोर्तजावी ने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति के भाषण में सामान्य विरोध के स्वर थे, लेकिन खास बात यह थी कि कूटनीतिक निकास का संकेत भी था।
उन्होंने न्यूज चैनल अल जजीरा से कहा, ‘ईरान इस युद्ध से निकलने का रास्ता चाहता है। उन्होंने कूटनीति का दरवाजा खुला रखा है।’
उन्होंने कहा, ‘ईरानी राष्ट्रपति के भाषण के बीच की पंक्तियां पढ़ें तो लगता है कि ईरान किसी ऐसे समझौते पर कुछ लचीलापन भी दिखा सकता है, जो बिल्कुल जून के उस समझौता ज्ञापन जैसा न हो, जिस पर राष्ट्रपति ट्रंप वापस लौटने को इच्छुक नहीं दिखते।’ वह ज्ञापन समाप्त हो चुका है और उसमें लड़ाई रोकने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को समुद्री यातायात के लिए खोलने की बात थी।
समझौता अभी भी संभव
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बमबारी तथा गाजा में इजरायल के हमलों के बीच समानता बताते हुए पेजेश्कियान ने कहा कि गाजा में इजरायल का नरसंहार ‘उस दोहरे मापदंड को उजागर करता है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान को देखता है।’
उन्होंने कहा, ‘वे मारते हैं और हमें प्रतिबंधित किया जाता है तथा दंडित किया जाता है।’










