रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में नेताओं के बीच खुली बहस का सिलसिला अब स्वास्थ्य व्यवस्था तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज (Deepak Baij) ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को खुली चुनौती दी है।
दीपक बैज ने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि किसी सरकारी अस्पताल में जाकर वहां की जमीनी स्थिति देखनी चाहिए। दीपक बैज ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री को चुनौती दी कि दोनों किसी भी सरकारी अस्पताल में जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लें।
इस चुनौती को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार कर लिया और कहा कि अस्पताल का चयन दीपक बैज कर लें, वह वहां साथ चलने के लिए तैयार हैं।
अभी तक अस्पताल और तारीख को लेकर अंतिम घोषणा नहीं हुई है। अब यह जिम्मेदारी दीपक बैज पर है कि वह किस अस्पताल का चयन करते हैं और दोनों नेताओं के बीच यह आमने-सामने का कार्यक्रम कब होता है।
भूपेश-विजय की बहस के बाद अब बैज-जायसवाल
स्वास्थ्य व्यवस्था पर यह चुनौती ऐसे समय आई है जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में नेताओं के बीच सार्वजनिक बहस का सिलसिला चर्चा में है।
इससे पहले 15 सितंबर 2026 को रायपुर प्रेस क्लब में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर खुली बहस हुई थी। करीब 80 मिनट चली इस बहस में दोनों नेताओं ने योजना से जुड़े आंकड़ों और अपने-अपने दावों को सामने रखा था।
अब इसी तरह की चुनौती स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सामने आई है।
दीपक बैज की चुनौती और श्याम बिहारी जायसवाल की स्वीकृति के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं चर्चा के केंद्र में आ सकती हैं।
यदि दोनों नेता किसी अस्पताल में साथ पहुंचते हैं तो वहां मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं, डॉक्टर और स्टाफ की उपलब्धता, दवाइयां, जांच सुविधाएं, उपकरण और अस्पताल की अन्य व्यवस्थाएं चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों नेताओं के बीच होने वाला कार्यक्रम सिर्फ संयुक्त अस्पताल दौरा होगा या इसे औपचारिक खुली बहस का रूप दिया जाएगा।
अब इंतजार अस्पताल और तारीख का
फिलहाल स्थिति साफ है। इस बार चुनौती दीपक बैज ने दी है और उसे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार कर लिया है। अब निगाह इस बात पर है कि दीपक बैज किस सरकारी अस्पताल का चयन करते हैं और दोनों नेता वहां कब पहुंचते हैं।
इस चुनौती के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक और सवाल सामने है- क्या स्वास्थ्य व्यवस्था पर यह बहस भी प्रधानमंत्री आवास योजना की बहस की तरह सार्वजनिक मंच पर होगी, या फिर दोनों नेता सीधे अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे?










