BRICS Summit 2026 : दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS समिट के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के नेताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और जरूरी मिनरल्स को हथियार की तरह इस्तेमाल करना गलत है। इससे दुनिया की तरक्की पर असर पड़ता है। PM मोदी ने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावटों ने साफ दिखा दिया है कि दुनिया के देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। किसी एक जगह आया संकट दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने BRICS देशों से आपसी सहयोग बढ़ाने और मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में भारत मंडपम में सदस्य देशों के नेताओं का ग्रुप फोटो सेशन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दोनों ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए।

द्विपक्षीय बैठकें और डिनर
आज प्रधानमंत्री मोदी सात देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। समिट के पहले दिन डिनर का आयोजन किया गया था। इसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस को छोड़कर बाकी सभी नेता मौजूद रहे। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद समिट में शामिल होने के बाद अपने देश लौट गए थे। सूत्रों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति आराम करने के लिए होटल लौट गए थे।
नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी
BRICS देशों ने शनिवार को नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई मुद्दों पर साझा सहमति बनी। डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत सभी BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी। यह संयुक्त बयान ऐसे समय में जारी हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब तथा UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं।
ठोस नतीजों पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। दुनिया को अब सिर्फ विचार और वादे नहीं, बल्कि ठोस नतीजों की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘मुझे भरोसा है कि हम मिलकर इन उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।’ उन्होंने अगले BRICS समिट की मेजबानी के लिए चीन को शुभकामनाएं दीं और नई दिल्ली समिट को सफल बनाने में सभी नेताओं तथा उनकी टीमों की सराहना की।
BRICS में चार प्रमुख फोकस क्षेत्र
PM मोदी ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में BRICS के काम को चार मुख्य बातों पर आगे बढ़ाया गया:
रेजिलिएंस (लचीलापन)
इनोवेशन (नवाचार)
कोऑपरेशन (सहयोग)
सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता)
उन्होंने कहा कि BRICS कनेक्ट के जरिए लोगों को जरूरी स्किल सिखाने, रोजगार बढ़ाने और महिलाओं को ज्यादा मौके देने पर काम किया गया है। छोटे कारोबारों की मदद के लिए BRICS MSME पोर्टल भी शुरू किया गया है। इसके अलावा, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए BRICS लॉजिस्टिक सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क, स्टार्टअप्स को जोड़ने के लिए इनक्यूबेटर नेटवर्क और BRICS स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव भी रखा गया।
संकटों से निपटने की तैयारी
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में तनाव बढ़ रहा है और इसका असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। इसी वजह से भारत ने BRICS देशों को संकटों से निपटने के लिए पहले से तैयार रखने पर जोर दिया है। संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए ‘BRICS इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति बनी है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली समिट में शामिल होने के बाद दिल्ली से रवाना हो गए।
BRICS क्या है?
BRICS 11 देशों का समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसका मकसद सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है। भारत इस साल BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है।









