सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट का आरोप, MDM से बीमार बच्चों की रिपोर्टिंग के दौरान हुआ विवाद

सहरसा। बिहार के सहरसा (Saharsa) सदर अस्पताल में शनिवार, 12 सितंबर को मिड-डे मील खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की रिपोर्टिंग करने पहुंचे एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट और अभद्रता का मामला सामने आया है। पत्रकार ने अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर मारपीट, धमकी देने और सामान छीनने के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

करीब 24 बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबर पर अस्पताल पहुंचे थे पत्रकार

जानकारी के मुताबिक, कहरा प्रखंड के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद करीब 24 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी। बच्चों को इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। इसी घटना की रिपोर्टिंग के लिए प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार अभिषेक कुमार अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों की स्थिति का वीडियो बनाया और परिजनों से बातचीत की। इसके बाद अस्पताल के बाहर बरामदे में घटना को लेकर पीटीसी रिकॉर्ड कर रहे थे।

अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के बाद बढ़ा विवाद

पत्रकार के आवेदन के अनुसार, अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी ने डॉक्टरों से पत्रकार की मौजूदगी को लेकर शिकायत की। इसके बाद अस्पताल प्रभारी डॉ. अजीत और डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. एसके आजाद के साथ उनकी कहासुनी हुई। पत्रकार का आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और धमकी दी गई। वायरल वीडियो में भी कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा सुनाई दे रही है। हालांकि, वीडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

20-25 लोगों के घेरने और मारपीट का आरोप

अभिषेक कुमार ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि इसके बाद करीब 20 से 25 लोग वहां पहुंच गए। इनमें स्वास्थ्यकर्मी और पैरा-मेडिकल छात्र भी शामिल थे। आरोप है कि उनके साथ हाथापाई की गई और उन्हें जबरन ओटी की तरफ ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया। पत्रकार ने कमरे के अंदर गला दबाने और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका मोबाइल फोन और माइक तोड़ दिया गया।

पैसे और सोने की चेन-कुंडल छीनने का आरोप

पत्रकार के मुताबिक, मारपीट के दौरान उनकी जेब से करीब 2,500 रुपये, सोने का कान का कुंडल और गले की चेन भी ले ली गई। एक चिकित्सक पर जहरीली सुई लगाने की धमकी देने और हमला करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है। घटना के बाद घायल पत्रकार को इलाज के लिए श्री नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

अभिषेक कुमार ने सदर थाना में आवेदन देकर नामजद डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, कथित तौर पर छीने गए सामान की बरामदगी और मेडिकल जांच की भी मांग की है।

अस्पताल प्रशासन ने लगाए अलग आरोप

वहीं, अस्पताल अधीक्षक की ओर से भी पुलिस को आवेदन दिया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चों का इलाज चल रहा था और पत्रकार बिना अनुमति वार्ड में जाकर मरीजों और उनके परिजनों के बयान ले रहे थे। इससे इलाज में व्यवधान हो रहा था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, पत्रकारों को बाहर जाने के लिए कहा गया, लेकिन कुछ पत्रकार, जिनमें अभिषेक कुमार और चेतन कुमार का नाम बताया गया है, लाइव कवरेज करते रहे। इसके बाद अस्पताल में हंगामा होने का दावा किया गया है।

DM ने लिया संज्ञान, जांच के निर्देश

मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भी इसका संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी दीपेश कुमार ने सदर एसडीओ और डीपीएम को जांच के लिए भेजकर तत्काल रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने जांच रिपोर्ट के आधार पर कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया है। सिविल सर्जन डॉ. राज नारायण प्रसाद ने कहा है कि लिखित शिकायत मिलने के बाद मामले की विधिवत जांच की जाएगी। वहीं, थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान ने भी दोनों पक्षों के आवेदनों की जांच की बात कही है।

पत्रकार संगठनों ने जताया विरोध

घटना के बाद स्थानीय पत्रकार संगठनों में भी नाराजगी है। पत्रकारों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। विधायक इंजीनियर आईपी गुप्ता ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी रिपोर्टिंग पर आपत्ति हो तो पुलिस या प्रशासन से शिकायत की जा सकती है, लेकिन पत्रकार के साथ मारपीट स्वीकार नहीं की जा सकती। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को आवेदन दिया गया है। 13 सितंबर की दोपहर तक FIR, गिरफ्तारी या किसी अंतिम कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि घटना में वास्तव में क्या हुआ था और आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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