नेशनल ब्यूरो । दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) के बेटे निखिल गडकरी द्वारा दायर 10 करोड़ रुपये के मानहानि के मुकदमे में द कारवां पत्रिका के एडिटर-इन-चीफ और एक पत्रकार को जवाब देने का निर्देश दिया है।यह मुकदमा द कारवां में 1 मार्च 2026 को प्रकाशित लेख ‘Nagpur’s Beef – The Beef Company Enmeshed in Gadkari’s Business Empire’ पर आधारित है।
लेख में निखिल गडकरी की कंपनी सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और बीफ निर्यात करने वाली कंपनी रेंबल एग्रो के बीच कथित वित्तीय संबंधों का आरोप लगाया गया था। लेख में दावा किया गया था कि रेंबल से जुड़े कुछ लोगों के पास सियान के शेयर हैं और उन्हें सियान से कर्ज भी मिला है।निखिल गडकरी लेख और उससे जुड़ी सभी सामग्री हटाने की मांग की है।
उन्होंने अदालत से यह भी कहा कि द कारवां को भविष्य में कोई भी झूठी, दुर्भावनापूर्ण या मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने से रोका जाए।जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने 10 अगस्त को प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और लेख पर अंतरिम रोक लगाने की मांग पर जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी।
निखिल गडकरी का कहना है कि उनकी कंपनी पूरी तरह से शाकाहारी कृषि उत्पादों (फ्रोजन सब्जियां, मसाले, चीनी, खाद्य तेल और होम केयर उत्पाद) का कारोबार करती है। कंपनी के पास बीफ या किसी भी गोवंश मांस के वध, निर्माण या व्यापार की कोई अनुमति कभी नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया है क्योंकि वे भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री के बेटे हैं।
याचिका में कहा गया है कि लेख में झूठे, लापरवाह और भ्रामक बयान दिए गए हैं, जो यह गलत धारणा पैदा करते हैं कि कंपनी बीफ या गोवंश मांस के व्यापार से जुड़ी है। साथ ही लेख में बिफ जैसे कानूनी रूप से अलग शब्दों को जानबूझकर मिलाया गया है, ताकि सार्वजनिक आक्रोश और सांप्रदायिक संवेदनशीलता पैदा की जा सके।
लेख सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से फैला और कई इन्फ्लुएंसर्स ने इस पर वीडियो बनाए। अदालत ने कहा है कि वह पहले द कारवां का पक्ष सुनेगी और लेख के आधार की जांच करेगी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई पाबंदी लगाने का आदेश इसके बाद ही पारित किया जाएगा।








