NDA के सपने पर संकट, डिलिमिटेशन बिल के विरोध में CM विजय और स्टालिन साथ-साथ

नई दिल्ली। तमिलनाडु में चौंका देने वाले घटनाक्रम में तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार ने बुधवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक(Delimitation Bil) के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें विपक्षी डीएमके ने समर्थन दिया।

द टेलीग्राफ के अनुसार सी. जोसेफ विजय की सरकार द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को डीएमके का समर्थन एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए के लिए झटका है। विधानसभा में डीएमके का यह समर्थन उस समय आया है जब केंद्र की नई परिसीमन विधेयक योजना के समर्थन को लेकर तमाम मीडिया हाउस डीएमके के NDA के साथ जाने की बात कर रहे थे।

अंग्रेजी अखबाद द टेलीग्राफ के अनुसार तमिलनाडु विधानसभा में पारित विशेष प्रस्ताव भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से अनुरोध करता है कि लोकसभा सीटों की कुल संख्या मौजूदा 543 पर फ्रीज रखी जाए और लोकसभा-राज्यसभा सीटों का वर्तमान अनुपात 2.2:1 बनाए रखा जाए।तमिलनाडु का प्रस्ताव 2029 के लोकसभा चुनावों में मौजूदा 543 सीटों के आधार पर 33% महिला आरक्षण लागू करने की मांग करता है।

प्रस्ताव में कहा गया है, “राज्यों को आवंटित लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को वर्तमान स्तर पर स्थायी बना दिया जाए, यानी राज्यों के बीच आनुपातिक वितरण।” इसमें यह भी जोड़ा गया है कि यही बात विधानसभा चुनावों पर भी लागू होनी चाहिए।

तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि डीएमके ने प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और अपने पिता एम.के. स्टालिन द्वारा अप्रैल में संसद में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विधेयक का विरोध करने और उसकी हार में योगदान देने के प्रयासों का स्मरण किया।उदयनिधि ने कहा, “डीएमके ही पहली थी जिसने यह बताया कि अगर वर्तमान जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया तो कितना बड़ा खतरा है।”

डीएमके का यह समर्थन टीवीके के साथ उसके तनावपूर्ण संबंधों के बीच आया है। कुछ दिन पहले ही विपक्ष के नेता उदयनिधि को कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर टीवीके सरकार ने गिरफ्तार किया था, जिससे सत्ताधारी दल और डीएमके के बीच कड़वाहट शुरू हो गई थी।डीएमके ने 8 अगस्त को परिसीमन मुद्दे पर मुख्यमंत्री विजय द्वारा बुलाई गई तमिलनाडु के सांसदों की बैठक का भी बहिष्कार किया था।डीएमके का विधेयक पर रुख उसकी हालिया INDIA गठबंधन से बाहर निकलने के बाद चर्चा में रहा है।

कांग्रेस ने टीवीके के साथ गठबंधन किया था, जो हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनी और कांग्रेस तथा अन्य दलों की मदद से सरकार बनाई।अप्रैल में, 12 साल में पहली बार, नरेंद्र मोदी सरकार संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित कराने में असफल रही थी।एकजुट विपक्ष ने उस संवैधानिक संशोधन विधेयक को हरा दिया था, जो महिला आरक्षण को “कार्यान्वित” करने के लिए लोकसभा की सदस्य संख्या को 850 सीटों तक बढ़ाने की मांग करता था।द वायर ने रिपोर्ट किया था कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, और उसके साथ का परिसीमन विधेयक बड़े पैमाने पर बदलाव लाने की कोशिश करता था, जो न सिर्फ लोकसभा की सदस्य संख्या को 850 तक बढ़ा देता बल्कि संसदीय अंकगणित को मौलिक रूप से बदल देता और केंद्र-राज्य संबंधों को प्रभावित करता।उस समय डीएमके, जो कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी और INDIA ब्लॉक का हिस्सा भी थी, ने विधेयक का कड़ा

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