लेंस डेस्क । बिहार की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश सरकार विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की बड़ी योजना पर विचार कर रही है। राज्य की 50 लाख से अधिक महिलाओं को 50-50 हजार रुपये दिए जा सकते हैं। योजना के मुताबिक चुनाव से पहले महिलाओं के खाते में 20 हजार रुपये की पहली किस्त भेजी जाएगी। अगर भाजपा की सरकार दोबारा बनती है तो बाकी 30 हजार रुपये 10-10 हजार रुपये की तीन किस्तों में दिए जाएंगे। चुनाव अगले साल जनवरी-फरवरी में होने की संभावना है।
बिहार मॉडल से प्रेरित
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए थे। उस योजना को एनडीए की बड़ी जीत का एक बड़ा कारण माना गया। अब यूपी में भी इसी तर्ज पर योजना लागू करने की तैयारी चल रही है। सरकार गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों, अनुसूचित जाति-जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता देगी। जिन परिवारों की सालाना आय 12 लाख रुपये से कम है, उन्हें भी शामिल किया जा सकता है।
महिला वोटर्स पर फोकस
उत्तर प्रदेश में करीब 5.67 करोड़ महिला वोटर हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि महिलाओं को नकद सहायता देने वाली योजना चुनाव में गेम चेंजर साबित हो सकती है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में ऐसी योजनाओं का भाजपा को फायदा मिला था। राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्रनाथ भट्ट का कहना है कि अगर यूपी में भी यह योजना लागू होती है तो भाजपा को चुनावी लाभ मिलने की संभावना है। परिवार की एक महिला को आर्थिक मदद मिलने से पूरे परिवार के वोट प्रभावित हो सकते हैं।
सरकार की मौजूदा योजनाएं
यूपी में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत पहले से ही करीब 98 लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। नई योजना इन्हीं महिलाओं को और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से लाई जा सकती है। भाजपा नेता मानते हैं कि महिलाओं को बड़ी आर्थिक सहायता सपा के पीडीए फॉर्मूले की काट बन सकती है। 2024 लोकसभा चुनाव में सपा को इस मुद्दे से फायदा मिला था। अब भाजपा महिला वोटर्स को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटी है।
अभी योजना के अंतिम रूप पर मंथन चल रहा है। महिला कल्याण विभाग के जरिए इसे प्रस्तावित किया जा सकता है।











