रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले करीब 20 दिनों के दौरान राज्य के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ की है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, एक पूर्व मुख्य सचिव, एक अपर मुख्य सचिव (ACS) और सचिव स्तर के कुछ अधिकारियों को अलग-अलग दिनों में ईडी कार्यालय बुलाया गया।
जानकारी के अनुसार, अधिकारियों को तीन से चार दिनों तक ईडी कार्यालय आने के लिए कहा गया। हर दिन उन्हें कई घंटों तक कार्यालय में बैठाया गया, जबकि पूछताछ लगभग 15 से 20 मिनट तक ही चली। सूत्रों का कहना है कि पूछताछ पूरी तरह मौखिक रही।
जानकारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान अधिकारियों से मुख्य रूप से भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में कथित शराब घोटाले से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों, फाइलों की प्रक्रिया और उस समय की कार्यप्रणाली के संबंध में सवाल पूछे गए।
प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान किसी भी अधिकारी का मोबाइल फोन न तो जब्त किया गया और न ही उसकी डिजिटल या फोरेंसिक जांच की गई। ईडी ने केवल मौखिक रूप से जानकारी ली और अधिकारियों के जवाब दर्ज किए।
‘द लेंस’ ने जब इस मामले में एक पूर्व मुख्य सचिव से संपर्क किया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें ईडी की ओर से कोई बुलावा नहीं आया है और वे ईडी कार्यालय भी नहीं गए हैं। उन्होंने इस तरह की पूछताछ की जानकारी होने से भी इनकार किया।
फिलहाल ईडी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ‘द लेंस’ को मिली जानकारी के अनुसार, शराब घोटाला मामले में ईडी प्रशासनिक स्तर पर लिए गए निर्णयों और प्रक्रियाओं की भी पड़ताल कर रही है।








