रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा (CG Vidhan Sabha) के मानसून सत्र का आखिरी दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक जंग का गवाह बना। करीब 14 घंटे 30 मिनट तक चली लंबी बहस के बाद कांग्रेस द्वारा साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। देर रात तक चली इस बहस में सरकार और विपक्ष ने अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे, आरोपों और उपलब्धियों को पूरे दमखम से रखा।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश करते हुए अविश्वास प्रस्ताव रखा। जवाब में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह प्रस्ताव उनकी सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों के जनादेश के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता ने कांग्रेस को उसके झूठ, भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी की वजह से सत्ता से बाहर किया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि झूठ और भ्रष्टाचार में पीएचडी करने वालों को जनता पहले ही नकार चुकी है।
साय ने दावा किया कि अगला विधानसभा चुनाव भी भाजपा जीतेगी और इस बार पार्टी 70 से अधिक सीटें हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले 25 वर्षों तक सत्ता में वापस नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एक आदिवासी किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है और कांग्रेस इसी बात को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर घोटालों, वादाखिलाफी और दिल्ली का “एटीएम” बनकर काम करने का आरोप लगाया।
136 आरोपों के साथ सरकार को घेरा
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार के खिलाफ विस्तृत आरोप पत्र रखा। उन्होंने कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था, किसानों, युवाओं, महिलाओं, आदिवासियों और पर्यावरण जैसे लगभग हर मोर्चे पर विफल रही है।
महंत ने सबसे पहले हसदेव अरण्य का मुद्दा उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पर्यावरण की अनदेखी करते हुए कोयला खनन को बढ़ावा दे रही है। उनका दावा था कि 91 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति मिलने से करीब 15 हजार पेड़ों की कटाई होगी। उन्होंने हसदेव को ‘मध्य भारत का फेफड़ा’ बताते हुए कहा कि सरकार उद्योगपतियों के हित में प्रदेश के जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों से समझौता कर रही है।
इसके साथ ही उन्होंने नकटी गांव में तोड़फोड़, पेसा कानून के क्रियान्वयन, आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण, अबूझमाड़ में कथित पेड़ कटाई, भारतमाला परियोजना में कथित अनियमितताओं और आबकारी विभाग में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सरकार घिरी
नेता प्रतिपक्ष ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, बलौदाबाजार हिंसा और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में महिलाओं की सुरक्षा कमजोर हुई है और अपराध लगातार बढ़े हैं।
महंत ने सरकार के विजन डॉक्यूमेंट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र की उपेक्षा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार की बेरोजगारी भत्ता योजना बंद कर दी गई और बड़ी संख्या में किसान धान बेचने से वंचित रह गए।
भूपेश बघेल ने किसानों से लेकर महादेव ऐप तक उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी उपलब्धियां बताने में असफल रही है। बघेल ने किसानों, खाद संकट, धान खरीदी, राशन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, कानून-व्यवस्था और आदिवासी मुद्दों पर सरकार को घेरा।
उन्होंने तमनार, हसदेव, महादेव ऐप, नकली खाद, पेसा कानून और नकटी गांव जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सरकार जनता विरोधी फैसले ले रही है। बघेल ने यह भी कहा कि राज्य की सरकार किसी ‘अदृश्य शक्ति’ के इशारे पर चल रही है।
विजय शर्मा के बयान पर सदन में हंगामा
बहस के दौरान उस समय सदन का माहौल गरमा गया जब उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने अपने भाषण में राहुल गांधी और माओवादी हिडमा का संदर्भ दिया। देवेंद्र यादव सहित कांग्रेस विधायकों ने इसका कड़ा विरोध किया, जिसके चलते सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
अविश्वास प्रस्ताव क्यों होता है अहम?
अविश्वास प्रस्ताव केवल सरकार गिराने का संवैधानिक माध्यम नहीं होता, बल्कि यह विपक्ष के लिए सरकार के पूरे कार्यकाल का राजनीतिक और नीतिगत मूल्यांकन करने का अवसर भी होता है।
इस दौरान विपक्ष सरकार की विफलताओं को सामने रखता है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए आरोपों का जवाब देती है। यदि सरकार के पास सदन में बहुमत होता है तो प्रस्ताव स्वतः गिर जाता है। कई बार इसका फैसला ध्वनिमत से भी किया जाता है।
छत्तीसगढ़ में अब तक कोई अविश्वास प्रस्ताव सफल नहीं
छत्तीसगढ़ विधानसभा के गठन के बाद से अब तक 10 बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, लेकिन कोई भी प्रस्ताव सरकार को गिराने में सफल नहीं हुआ।
पहली विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ 2002 और 2003 में भाजपा ने दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में पांच बार अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
वहीं, भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ भाजपा ने 2022 और 2023 में दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया।
2023 के मानसून सत्र में भाजपा ने 109 बिंदुओं का आरोप पत्र पेश किया था, लेकिन कांग्रेस के भारी बहुमत के कारण वह प्रस्ताव भी ध्वनिमत से खारिज हो गया।
रिकॉर्ड के लिहाज से छत्तीसगढ़ विधानसभा में सबसे लंबी अविश्वास प्रस्ताव चर्चा जुलाई 2015 में हुई थी, जब डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ बहस 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी।
इस बार भी करीब साढ़े 14 घंटे तक चली बहस ने यह साफ कर दिया कि विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव केवल संख्याबल का नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का सबसे बड़ा मंच बन चुका है।









